काशीपुराधिपति बाबा विश्वनाथ का भव्य और मनोहारी रूप
- फोटो : amar ujala
बाबा की पंचबदन प्रतिमा का शृंगार कर फूलों और माला से सजाया गया। फल और मिष्ठान्न का भोग लगाकर परंपराओं का निर्वहन हुआ। बाबा का तिलकोत्सव पूर्ण होते ही भक्तों ने हर-हर महादेव के जयघोष से काशी की परंपरा को नमन किया। पूजन अर्चन और आरती के बाद बाबा का प्रसाद वितरित किया गया।
मां का भक्तों को भावविभोर कर देना वाला मनोहारी रूप
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क्षतिग्रस्त हुआ था सिंहासन
बाबा विश्वनाथ की पंचबदन रजत प्रतिमा का लगभग 350 वर्ष पुराना सिंहासन महंत आवास का एक हिस्सा गिरने की वजह से क्षतिग्रस्त हो गया था। हालांकि हादसे में बाबा की प्रतिमा सुरक्षित रही। इसके बाद से ही अस्थायी आवास में बाबा की प्रतिमा स्थापित कर पूर्व निर्धारित परंपराओं के अनुसार ही तिलकोत्सव का आयोजन किया गया।
भक्ति संध्या में प्रस्तुति देते भोजपुरी गायक रवींद्र सिंह ज्योति
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