वाराणसी। जनपद के किसानों में टिड्डी दल का खौफ इतना बढ़ गया है कि किसान अब ग्रास क्रापर (टिड्डी की एक प्रजाति) से भी डरने लगे हैं। कई किसानों ने टिड्डी के बचाव के लिए बनाए गए किसान नियंत्रण कक्ष में फोन कर ग्रास क्रापर से फसलों को बचाव बचाने की जानकारी ले रहे हैं। कृषि रक्षा विभाग द्वारा जनपद में दो नियंत्रण कक्ष बनाए गए हैं। इससे बचाव के लिए जानकारी के लिए केंद्रीय नियंत्रण कक्ष विकास भवन और क्षेत्रीय केंद्र चांदपुर के कृषि रक्षा कार्यालय में बनाया गया है।
पछुआ हवा के कारण टिड्डी दल के प्रयागराज की तरफ बढ़ने की सूचना के बाद आराजीलाइन और काशी विद्यापीठ विकास खंड के किसानों को सतर्क किया गया था। वाराणसी मंडल के संयुक्त निदेशक कृषि अखिलेश चंद्र शर्मा ने बताया कि सोमवार को ललितपुर जनपद के वनक्षेत्र में वृक्षों पर ठहरे टिड्डी दल ने उड़ना प्रारंभ किया। जो मध्य प्रदेश महरौनी, टीकमगढ़, निवाड़ी के से होते हुए छतरपुर की ओर जा रहे हैं। हवाओं का रुख इसी तरह रहा तो ये दल प्रयागराज की तरफ बढ़ सकता है। इस सप्ताह दो दिन से तापमान में 10 डिग्री बढ़त के बाद टिड्डियों का दल सक्रिय हो गया है। वहीं काशी विद्यापीठ विकास खंड की सीमा पर टिड्डियों के नियंत्रण के लिए तैनात सहायक कृषि रक्षा अधिकारी अवधेश कुमार ने बताया कि यदि पछुआ हवा चलती रही तो जनपद में टिड्डियों के खतरे की संभावना बढ़ सकती है। हालांकि इसके लिए चौकसी बढ़ा दी गई है। प्रतिदिन किसानों को टिड्डियों के हमले के बचाव के लिए जागरूक किया जा रहा है। एक सप्ताह में चोलापुर और बड़ागांव के दो किसानों ने ग्रास कॉपर से बचाव के लिए नियंत्रण कक्ष में फोन किया और उससे बचाव के विधि के बारे में जानकारी ली है।
इनसेट--------
ग्रास क्रापर से ज्यादा नुकसान नहीं
ग्रास क्रापर टिड्डी प्रजाति का कीड़ा है। यह खेतों में फसलों के बीच पाया जाता है। लेकिन यह दल में नहीं होते हैं। इससे ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचा पाते हैं। हालांकि दवा के छिड़काव से इससे बचा जा सकता है। हरी पत्ते वाली फसलों पर थोड़ा नुकसान पहुंचा पाते हैं। जबकि पाकिस्तान से आने वाली टिड्डी बड़े आकार में होती है और कड़ी फसलों को भी ज्यादा नुकसान पहुंचाते हैं।