छत के रास्ते घुसे थे आरोपी
बेटा संजय कपूर ने अदालत में बताया कि घटना की रात वह अपनी पत्नी और भांजे के साथ कमरे में सो रहे थे। माता-पिता दूसरे कमरे में थे। मकान निर्माणाधीन था और बदमाश छत के रास्ते सीढ़ियों से घर में दाखिल हुए थे। शोर सुनकर वह बाहर आए तो बदमाश माता-पिता के साथ मारपीट कर रहे थे। बचाने पर आरोपियों ने उसके साथ भी मारपीट की। पत्नी अनीता भी शोर सुनकर बाहर आई, उनके साथ भी मारपीट की गई। बदमाशों की संख्या चार-पांच थी और उनके हाथों में लोहे की रॉड व मोटे डंडे थे। घटना के दौरान घर की लाइटें जल रही थीं। बदमाश घर से नकदी, कपड़े, चाबी का गुच्छा, बैंक की पे-इन स्लिप बुक, यूटीआई से संबंधित कागजात, आभूषण समेत अन्य सामान ले गए थे।
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20 दिन बाद पुलिस ने दूसरे मामले में पकड़ा, तब खुला मामला
गवाह ने अदालत को बताया कि घटना के 20 दिन बाद पुलिस ने कुछ लोगों को आदमपुर थाने में पकड़े जाने की जानकारी दी। वह अपने भांजे यती टंडन के साथ पुलिस के कहने पर आदमपुर थाने गया। वहां चारों को पहचाना। इसके बाद पुलिस आरोपियों के साथ लेकर बरामदगी के लिए निकली। आरटीओ के पास एक पुलिया के नीचे से एक झोला बरामद किया गया। झोले में कपड़े, चाबी का गुच्छा, कैमरा, लेडीज रेजर, बैंक की पे-इन स्लिप, यूटीआई के कागजात समेत अन्य सामान मिला। गवाह ने अदालत में बरामद सामान की पहचान अपने घर से लूटे गए सामान के रूप में की।