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काशी की सुमेधा पाठक की कहानी: टीबी ने व्हीलचेयर से बांधा, अब पैरा एशियाई निशानेबाजी में खेलेंगी सुमेधा

Sat, 19 Sep 2026 12:42 PM IST
Pragati Chand अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

काशी की बेटी सुमेधा पाठक की राह ट्यूबरक्लॉसिस भी नहीं रोक सकी। ट्यूबरक्लॉसिस अटैक हुआ और कमर से निचले हिस्से ने काम करना बंद कर दिया। लेकिन सुमेधा ने हार नहीं मानी। वह हौसले के बदौलत अब तक 19 पदक जीत चुकी हैं।
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वाराणसी की सुमेधा पाठक - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दसवीं कक्षा तक एथलेटिक्स में पदक जीतने वाली सुमेधा पाठक को वर्ष 2013 में ट्यूबरक्लॉसिस का अटैक हुआ और कमर से निचले हिस्से ने काम करना बंद कर दिया। इसके बावजूद सुमेधा ने हार नहीं मानी और निशानेबाजी में हाथ आजमाया। अब तक वह 19 पदक जीत चुकी हैं। फिलहाल वह पैरा एशियाई खेलों की तैयारी में जुट गई हैं। सुमेधा जापान में 14 से 24 अक्तूबर तक आयोजित प्रतियोगिता में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व करेंगी।

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वाराणसी के दुर्गाकुंड क्षेत्र के मानस नगर एक्सटेंशन निवासी सुमेधा ने इसी सप्ताह कोरिया में आयोजित 10 मीटर पिस्टल की टीम स्पर्धा में रजत पदक हासिल किया है। इस जीत के साथ सुमेधा के पदकों की संख्या बढ़कर 19 हो गई है। पदक जीतने के बाद वह जापान में आयोजित पैरा एशियाई निशानेबाजी की 10 मीटर पिस्टल स्पर्धा में पदक जीतने की तैयारी में हैं। ऐसा करने वाली वह प्रदेश की पहली पैरा महिला खिलाड़ी बन गई हैं। बातचीत के दौरान सुमेधा पाठक ने अब तक मिली जीत का श्रेय बाबा काशी विश्वनाथ, माता-पिता और कोच को दिया है।

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दसवीं में पढ़ाई के दौरान वर्ष 2013 में उन्हें मल्टी ड्रग ट्यूबरक्लॉसिस बीमारी हुई और शरीर के निचले हिस्से में कमर से लेकर पैरों तक ने काम करना बंद कर दिया। उन्होंने 11वीं से निशानेबाजी में कदम बढ़ाया और 10 मीटर एयर पिस्टल वर्ग में अभ्यास शुरू किया। 2018 में प्री-स्टेट शूटिंग में स्वर्ण जीता। इसके बाद लगातार पदक जीत रही हैं। 

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2026 में उन्होंने दो पदक हासिल किए थे। उनके पिता ब्रजेश पाठक ने बताया कि 2018 में पदक जीतने के बाद उन्होंने चेन्नई में जीवी मावलंकर में कांस्य पदक जीता। 2021 में दूसरे पैरा नेशनल शूटिंग चैंपियनशिप में व्यक्तिगत स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता। उन्होंने तीसरे और चौथे पैरा नेशनल शूटिंग चैंपियनशिप में तीन स्वर्ण जीते। 2022 में फ्रांस के सेटूरेक्स वर्ल्ड कप और कोरिया में टीम स्पर्धा में रजत पदक जीता। 2023 में चीन में एशियन गेम्स की शूटिंग प्रतियोगिता के फाइनल में पहुंचीं और सातवां स्थान हासिल किया।

शूटिंग रेंज आने-जाने में परेशानी, घर में बनाया शूटिंग रेंज
शूटिंग रेंज दूर होने के कारण उसे आने-जाने में परेशानी होती थी। इसलिए उनके पिता ने घर में ही 10 मीटर पिस्टल का रेंज बना दिया है। यहां वह हर रोज कम से कम तीन घंटे अभ्यास करती हैं। शूटिंग अभ्यास के अलावा वह ध्यान केंद्रित करने के लिए एक घंटे योग और हाथ की स्ट्रेंथनिंग का व्यायाम करती हैं।
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