ऐसे में कोई स्वतंत्र साक्षी का बयान नहीं लिया गया। अपहरण स्थल को लेकर विरोधाभास है, आरोपी व वादी एक दूसरे को जानते व पहचानते नहीं थे। बावजूद इसके नामजद मुकदमा पता व वल्दियत के साथ अंकित कराया गया, जो यह साबित करता है कि पूरा घटनाक्रम एक सोची समझी साजिश के तहत रचा गया है। अदालत ने आरोप सिद्ध नहीं होने पर आरोपियों को बरी कर दिया।