गाजीपुर। जिले के सैदपुर (सुरक्षित) विधानसभा सीट पर इस बार त्रिकोणात्मक संघर्ष होगा। भौगोलिक दृष्टि से गाजीपुर-वाराणसी के ठीक मध्य स्थित यह सीट पहले वाराणसी जिले की हुआ करती थी। वर्ष 2012 में चुनाव आयोग के नए परिसीमन के बाद सीट सुरक्षित कर दी गई। जातिगत समीकरण के शिकंजे में जकड़ी सैदपुर विधानसभा क्षेत्र की सीट की डगर इस बार किसी प्रत्याशी के लिए आसान नहीं कही जा सकती। प्रबुद्ध जन इस सीट पर सपा-भाजपा का सीधा मुकाबला मान रहा है लेकिन क्षेत्र में जिस तरह का संघर्ष का दौर है उसमें बसपा भी अपने को कहीं से कम नहीं मान रही। समीकरण बताते हैं कि बसपा अगर कसकर लड़ती है तो भाजपा को फायदा होगा। दूसरी ओर सपा का परंपरागत वोट पूरी तरह लामबंद है, ऐसे में जीत-हार का अंतर कम होगा।
इस विधानसभा क्षेत्र में पिछले दो चुनावों में सपा का वर्चस्व रहा है। दोनों बार सपा प्रत्याशी के रूप में सुभाष पासी ने चुनाव जीता था। अबकी बार वह सपा से पाला बदलकर भाजपा में शामिल हो गए हैं। भाजपा निषाद पार्टी गठबंधन के प्रत्याशी के रूप में वह तिकड़ी लगाने के लिए बेताब हैं। समाजवादी पार्टी सुभाष पासी को रोकने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती। सपा ने पहली बार चुनाव लड़ रहे युवा प्रत्याशी अंकित भारती पर दांव लगाया है। जिला पंचायत सदस्य के रूप में राजनीति में पदार्पण करते हुए अपने पिता ओमप्रकाश भारती के प्रभाव से समाजवादी पार्टी से टिकट पाने में कामयाब होकर उन्होंने मुकाबले को रोचक बना दिया है। दूसरी ओर सैदपुर में दिन प्रति दिन मजबूत होती बसपा ने भी सपा एवं भाजपा को मात देने के लिए डॉ. विनोद कुमार को प्रत्याशी बनाया है। बसपा कई चुनाव में निकटतम प्रतिद्वंद्वी के रूप में संघर्ष करती आ रही है। इस बार उसे अपने परंपरागत वोटों के अलावा अन्य मतों के भी मिलने के आसार हैं। वर्ष 2017 में सपा के सुभाष पासी ने भाजपा के विद्यासागर सोनकर को 8710 मतों के अंतर से हराया था। तब बसपा यहां तीसरे स्थान पर थी। इस बार सैदपुर विधानसभा क्षेत्र में 30 हजार से अधिक युवा मतदाता वोटर बने हैं। नए युवा मतदाताओं का रुझान यहां नए गुल खिला सकता है।
पिछली बार के चुनाव में सपा का कांग्रेस के साथ गठबंधन था और कांग्रेस के वोट भी सुभाष पासी के खाते में गए थे। इस बार कांग्रेस की महिला प्रत्याशी सीमा देवी भी चुनाव मैदान में हैं। इसलिए उनके खाते में पिछली बार मिला कांग्रेस का वोट सपा के खाते से कम होगा। हालांकि सपा के अंकित भारती युवा चेहरा हैं और उन्हें युवाओं पर भरोसा है। यादव मतदाताओं के अलावा कोइरी, कुर्मी, चौहान, बिंद जाति के वोटों के अलावा अनुसूचित वर्ग के अन्य वोटों के ध्रुवीकरण में वह जी-जान से लगे हुए हैं।
सपा के इस किले को भेदने के लिए भाजपा गठबंधन पार्टी के प्रत्याशी सुभाष पासी को कम नहीं आंका जा सकता। दस वर्ष के अपने विधायकी के कार्यकाल और उनकी सामाजिक संस्था अक्षर फाउंडेशन के माध्यम से की गई सेवाओं से उनके व्यक्तिगत संबंध भी उनके लिए प्लस प्वाइंट हैं। सवर्ण वोटों के अलावा उन्हें हर वर्ग के वोटों पर भरोसा है। भाजपा का पूरा फोकस सवर्ण मतदाताओं की ओर है। इसके अलावा वह पिछड़े वर्ग के वोटों में निषाद जाति के लोगों के अतिरिक्त सोनकर, राजभर एवं वनवासी समाज के मतों के लिए दिन-रात मेहनत कर रहे हैं।
दिग्गजों का गढ़ रही है सीट
सांस्कृतिक, साहित्यिक, शैक्षिक एवं आध्यात्मिक गतिविधियों से भरे सैदपुर विधानसभा क्षेत्र राजनीतिज्ञों का गढ़ रहा है। इस विधानसभा क्षेत्र के मलिकपुर गांव के निवासी कलराज मिश्र राजस्थान के राज्यपाल हैं तो डा. महेंद्रनाथ पांडेय का गृह क्षेत्र भी यहीं है। सपा के दिग्गज नेता रहे रामकरन यादव दादा इसी क्षेत्र के निवासी रहे और यहां से विधानसभा और विधान परिषद के सदस्य के रूप में क्षेत्र का कई बार प्रतिनिधित्व किया है। प्रदेश की पूर्ववर्ती सरकारों में यहां से निर्वाचित जनप्रतिनिधियों में बसपा के कैलाश यादव एवं लालजी चौहान के नाम भी उल्लेखनीय हैं।
वोटों का गणित
कुल मतदाता- 398243
पुरुष- 202611
महिला- 170669
थर्ड जेंडर- 29
जातिगत समीकरण
यादव- 92 हजार
अनुसूचित जाति- 78 हजार
क्षत्रिय- 65 हजार
ब्राह्मण- 58 हजार
कुशवाहा-बिंद-चौहान- 42 हजार
मुस्लिम मतदाता- 23 हजार
अन्य जाति- 12 हजार
2017 का परिणाम
सुभाष पासी- (सपा) 76664
विद्यासागर सोनकर- (भाजपा) 67954
राजीव किरण- (बसपा) 59726