स्मार्ट सिटी के दूसरे फेज में काशी को शामिल कराने के लिए रविवार को बनारस क्लब में काशी के प्रबुद्धजन एक मंच पर जुटे। नगर निगम की ओर से क्लब में ‘क्या हो काशी का दृष्टिकोण? आइए काशी को जाने’ विषय पर आयोजित कार्यशाला में पर्यटन, कूड़ा प्रबंधन, धरोहर संरक्षण, कला, संस्कृति, पर्यावरण को कैसे बचाया जा सकता है, इस पर मंथन हुआ। ट्रैफिक, कारोबार, बुनियादी सुविधाओं को बेहतर करने, शहर में हरियाली बढ़ाने पर भी शहर के बुद्धिजीवियों, शिक्षाविदों, गण्यमान्य नागरिकों और उद्यमियों ने बेबाकी से अपने विचार और सुझाव रखे। छह टीमें बनाकर ग्रुप में सुझाव लिए गए और टीम लीडर ने उसे प्रस्तुत किया।
स्मार्ट सिटी में इस बार काशी चूक न जाए, इसके लिए शहर के लोगों ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया है। नगर निगम की कार्यशाला में विद्वानों ने कहा कि पुरातन बनारस अस्सी से राजघाट तक के हेरिटेज को संरक्षित करते हुए नागरिक सुविधाओं का विकास होना चाहिए। ताकि बनारस की खासियत और पहचान भी बनी रहे और बेहतर सुविधाएं भी मुहैया हो सकें। सुझावों को स्मार्ट सिटी की वेबसाइट पर भी अपलोड किया जाएगा।
वक्ताओं ने कहा कि यहां कूड़ा प्रबंधन के साथ सीवेज सिस्टम, ट्रैफिक को बेहतर करने की जरूरत है। शेष बनारस को जोनवार बांटकर एक-एक क्षेत्र का विकास किया जाए। शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन, अर्थ एवं कारोबार का अलग-अलग क्षेत्र होना चाहिए। पर्यटन को बढ़ाने की जरूरत है। यहां पर्यटन विस्तार की असीम संभावनाएं हैं। लोगों ने कहा कि काशी को कला, साहित्य, संगीत, शिक्षा, संस्कृति, पर्यटन, मां गंगा और घाट विरासत के रूप में मिले हैं। जरूरत है इन्हें संरक्षित करते हुए बुनियादी सुविधाओं को बेहतर करने की। इससे पूरी दुनिया में काशी की पहचान और सशक्त बनकर उभरेगी। पर्यटन के नजरिये से भी इसका लाभ मिलेगा।
कार्यशाला में छह ग्रुप बनाए गए थे। कबीर, तुलसी, रविदास, गंगा, वरुणा और अस्सी। इन ग्रुपों में पांच से छह लोगों को शामिल किया गया था। प्रत्येक ग्रुप की ओर से आए सुझावों को एकत्रित कर ग्रुप लीडर ने उसे रिप्रजेंट किया। प्रो. मंजुला चतुर्वेदी, बनारस क्लब के सचिव कुमार अग्रवाल, पूजा मधोक, नीलू मिश्रा, अल्पना राय, प्रदीप मधोक बाबा, आर्किटेक्ट आरसी जैन, उद्यमी, आरके चौधरी, सोनी चौरसिया, नगर निगम के राजकुमार अग्रवाल, अविनाश कुमार, ऋतुराज, प्रवीण कुमार आदि उपस्थित थे।