लमही स्थित मुंशी प्रेंमचंद्र की पैतृक आवास का दरवाजा टूटा
- फोटो : अमर उजाला
मुंशी प्रेमचंद के प्रपौत्र दुर्गा प्रसाद श्रीवास्तव का कहना है कि हर साल जयंती समारोह पर घोषणाएं तो होती हैं, लेकिन लमही के लाल की निशानी को संरक्षित करने का कोई ठोस प्रयास आज तक नहीं हुआ। वहीं, प्रशासनिक सूत्रों की मानें तो कथा सम्राट के परिजनों से वार्ता लगातार जारी है। मालिकाना हक या परिजनों की सहमति सरकार के पास नहीं हाेने के कारण राष्ट्रीय स्मारक बनाने की योजना आगे नहीं बढ़ पा रही है।
2005 से लगातार हो रही हैं घोषणाएं
2005 में मुंशी प्रेमचंद की 125वीं जयंती पर संस्कृति मंत्री जयपाल रेड्डी ने मुंशी प्रेमचंद के आवास को राष्ट्रीय स्मारक घोषित किया था और शोध संस्थान के निर्माण के लिए पांच करोड़ रुपये भी दिए थे। उसी समय तत्कालीन सीएम मुलायम सिंह यादव ने मकान और स्मारक के लिए 25 लाख रुपये की धनराशि आवंटित करने की घोषणा की थी। 2011 में मुंशी जी की जन्मस्थली को पर्यटन केंद्र के रूप में घोषित करने की बात हुई लेकिन प्रदेश सरकार ने केंद्र सरकार को प्रस्ताव नहीं भेजा। 2016 में इसे हेरिटेज विलेज बनाने की घोषणा की गई। 2018 में भी आभासी म्यूजियम बनाने की घोषणा की गई थी लेकिन आज तक जमीन पर कुछ नहीं उतर सका है। प्रशासन ने 2021 में राष्ट्रीय स्मारक के लिए 25 लाख रुपये की पहली किश्त जारी की थी लेकिन काम आगे नहीं बढ़ सका। संस्कृति विभाग की ओर से लाइट एंड साउंड सिस्टम शो चलाने का प्रस्ताव तैयार किया गया था। 2018 में जयंती समारोह पर इसको चलाया गया लेकिन इसके बाद किसी ने दोबारा इसको देखा तक नहीं।