पुलिस और प्रशासन के 30 अधिकारियों ने शहर के 15 प्रमुख चौराहों को गोद तो लिया लेकिन उसके बाद उनकी सुधि लेना तो दूर झांकने तक नहीं गए। इन सभी 15 चौराहों पर अतिक्रमण, जाम और गंदगी की समस्या मंगलवार को गोद लेने के 18 दिन बाद भी पहले की तरह ही दिखी। चौराहों के देखरेख की जिम्मेदारी सौंपने वाले जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक चौराहों को गोद लेने वाले अधिकारियों से इसका फॉलोअप तक नहीं कर पाए कि उन्होंने अतिक्रमण, जाम और गंदगी की समस्या हल करने के लिए क्या पहल की। कुछ काम हुआ भी कि नहीं। और तो और, जिस चौराहे को खुद डीएम और एसएसपी ने गोद लिया है, उसके भी हालात दुरुस्त नहीं हैं।
बीते चार नवंबर को पांडेयपुर चौराहा को डीएम योगेश्वर राम मिश्र और एसएसपी नितिन तिवारी ने गोद लिया था। वहीं, गोदौलिया, साजन तिराहा, मछली सट्टी भोजूबीर, मालवीय चौराहा लंका, लहुराबीर, मैदागिन, गोलगड्डा, चांदपुर, बुलानाला, नाटी इमली, रामापुरा, रथयात्रा, पुलिस लाइन और सारनाथ के पंचक्रोशी चौराहा को पुलिस और प्रशासन के 28 अधिकारियों को गोद दिया गया था। डीएम और एसएसपी का अपने मातहतों को निर्देश था कि गोद लिए गए चौराहों पर स्थानीय लोगोें की मदद से अतिक्रमण हटवाया जाए। ऐसी व्यवस्था हो कि जाम न लगने पाए, हमेशा सफाई रहे। इसके साथ ही नगर निगम और अन्य विभागों से संपर्क कर सभी चौराहों पर सिग्नल लाइट सहित सुंदरीकरण से संबंधित अन्य व्यवस्थाएं की जानी थी। मगर, सभी चौराहों का हाल गोद लिए जाने से पहले जैसा ही है। बेतरतीब तरीके से खड़ी बाइक, अवैध ऑटो स्टैंड, सड़कोें और पटरियों पर अतिक्रमण डीएम-एसएसपी के चौराहों को गोद लिए जाने की व्यवस्था को मुंह चिढ़ाते हैं लेकिन किसी को ध्यान देने की फुरसत ही नहीं है।
इस बारे में डीएम योगेश्वर राम मिश्र ने कहा कि चौराहोें को गोद लेने वाले सभी अधिकारियोेें के कार्यों की जल्द ही समीक्षा की जाएगी। चौराहों के सुंदरीकरण के प्रति जो प्रतिबद्धता जाहिर की गई है उसे हर हाल में पूरा किया जाएगा।