जेल मैन्युअल के अनुसार कारागार में निरुद्ध बंदियों की देखरेख के लिए 10 बंदी पर एक सिपाही तैनात होना चाहिए। मगर, इस मामले में वाराणसी जिला कारागार का बुरा हाल है। जिला जेल में मौजूदा समय में 32 बंदियों पर एक सिपाही तैनात है। इसके साथ ही पूर्वांचल की इस अति संवेदनशील जेल में लंबे अरसे से जेल अधीक्षक का पद खाली है।
कुछ ऐसा ही हाल डिप्टी जेलर, हेड वार्डर और बंदीरक्षकों के पद का भी है। इन हालात में आसानी से समझा जा सकता है कि बंदी जेल में मनमानी क्यों करते हैं, और उनकी गतिविधियों की निगरानी को लेकर सरकार भी कितनी गंभीर है।
जिला जेल की क्षमता 747 बंदियों की है मगर मौजूद समय में यहां 2183 बंदी निरुद्ध हैं। 747 बंदियों के लिए 93 बंदीरक्षक, 13 वार्डर और छह डिप्टी जेलर तैनात होने चाहिए। मगर, मौजूदा समय में यहां 68 बंदीरक्षक, आठ हेड वार्डर और चार डिप्टी जेलर ही तैनात हैं।
इसके चलते जेल में निरुद्ध कुख्यात बदमाश वर्चस्व स्थापित करने के लिए एक-दूसरे को देख लेने की धमकी देते हैं और माहौल अराजक सा रहता है। वहीं, क्षमता से तीन गुना ज्यादा बंदी के निरुद्ध होने के कारण जिला जेल के बंदियों को पीने का पानी, शौचालय और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए परेशान होना पड़ता है। इस संबंध में जेलर पीके त्रिवेदी ने बताया कि उपलब्ध संसाधनों के आधार पर बेहतर करने का प्रयास किया जा रहा है।
जिला जेल में निगरानी के लिए वॉच टॉवर चाहिए लेकिन अब तक निर्माण नहीं कराया जा सका है। वहीं, गेट पर तैनात पीएसी के जवानों को सुबह से रात के बीच जेल के चौतरफा तीन-चार चक्कर लगाना चाहिए लेकिन वो ऐसा नहीं करते हैं। इसके चलते जेल में निरुद्ध बदमाशों के करीबी बंदीरक्षकों के आवास की ओर से आसानी से जेल की चहारदीवारी के भीतर बैरक नंबर 10, 11, 12 और 13 की तरफ मोबाइल फेंक देते हैं। जैमर 4 जी क्षमता का होना चाहिए लेकिन अभी तक 2 जी क्षमता का ही है और बार-बार प्रस्ताव भेजे जाने के बाद भी इन्हें अपग्रेड नहीं किया जा सका है।
20 की जगह कैद हैं इतने महिला बंदी
वाराणसी जिला जेल में सिर्फ 20 महिला बंदियों को निरुद्ध करने की जगह है। मगर, मौजूदा समय में यहां 101 महिला बंदी और सात बच्चे निरुद्ध हैं। निर्धारित क्षमता से पांच गुना ज्यादा महिलाओं के निरुद्ध होने पर समझा जा सकता है कि आखिरकार वो जेल की चहारदीवारी के भीतर किस तरह से रहती होंगी।