मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर कराए गए सर्वे में 15 हजार से अधिक बांग्लादेशियों के अवैध तरीके से बनारस में रहने की आशंका के बावजूद पुलिस एक भी ऐसे व्यक्ति की तस्दीक नहीं कर पाया है।
जिन डेढ़ दर्जन चिह्नित इलाकों में सर्वे कराया गया, वहां के बाशिंदों के पास मतदाता परिचय पत्र, राशन कार्ड और आधार कार्ड जैसे अहम दस्तावेज देख खुफिया इकाई के अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए उनकी मूल नागरिकता तय कर पाना मुश्किल हो गया। इन्होंने न सिर्फ भारतीय नागरिकता के दावे किए बल्कि बोली-भाषा से जुड़े सवालों पर जवाब दिया कि हम बांग्लादेशी नहीं बांग्लाभाषी है सर... कितनी बार हमारा वेरिफिकेशन होगा...।
खुफिया इकाइयों के पूर्व के अनुमान के अनुसार शहर और इससे सटे इलाकों में 15 हजार से अधिक बांग्लादेशी नागरिक अवैध तरीके से रहकर रिक्शा चलाने, मजदूरी, घरेलू नौकर के साथ ही होटलों-ढाबों, ठेले-खोमचों पर काम करते हैं। इनमें से कई बस्तियों का कुछ वर्षों पहले तक नामोनिशान नहीं था।
15 अक्तूबर को वीडियो कांफ्रेंसिंग में सीएम के निर्देश के आधार पर भेलूपुर के बजरडीहा, खोजवा, लंका के नगवां, दशाश्वमेध, कोतवाली, जैतपुरा, आदमपुर, रामनगर के सूजाबाद, नगर निगम पुलिस चौकी क्षेत्र, कैंट रेलवे स्टेशन के आसपास, वरुणा पार की प्रेमचंद नगर कॉलोनी और आवास विकास कॉलोनी के साथ ही शहर के बाहरी इलाकोें की झोपड़ पट्टियों में सर्वे कराया गया। जहां-जहां सर्वे किया गया है,