बीएचयू के वैदिक विज्ञान केंद्र में चल रही अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन पर अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा और यूक्रेन के वैज्ञानिकों ने वैदिक ज्ञान को सबका आधार बताया। नासा के पूर्व वैज्ञानिक और भारत के पूर्व वैज्ञानिक सलाहकार डॉ. ओम प्रकाश पांडेय ने कहा कि 13.8 अरब साल पहले बिगबैंग से ये धरती नहीं बनी थी बल्कि उसके पहले भी तीन कल्प (एक कल्प में 4 अरब 32 करोड़) गुजर चुके थे। ऋषियों ने सारे मंत्रों से देखा था। बिना किसी वेधशाला के ऋषियों ने 14 प्राचीन ग्रंथ भुवनकोश की बात की है। दरअसल पश्चिम का विज्ञान ज्योतिषशास्त्रों का बिगाड़ा हुआ हिस्सा है। उन्होंने कहा कि ज्योतिष पढ़ने वालों को साधना की जरूरत है। सत्य को आचरण में शामिल करने से समाज में धर्मांतरण पर रोक लगाई जा सकती है।
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यूक्रेन से आईं ज्योतिषाचार्य हेना ने कहा कि उन्होने डोनबास स्थित अपना सब कुछ इसी युद्ध में ही गवा दिया है लेकिन वैदिक ज्ञान ने अवसाद में नहीं जाने दिया। वैदिक ज्ञान के लिए यूक्रेन में ही एक वैदिक स्कूल शांताराम की स्थापना की। यहां छोटे बच्चों को पढ़ाया जाता है ताकि देश का भविष्य घृणा से न तैयार हो।
युद्ध के समय में वैदिक ज्ञान जीवन का एक संबल बनता है। कलियुग में शासन और युद्ध के तरीके पहले जैसे धर्म के अनुसार नहीं हैं। आजकल युद्ध में निर्दोष लोगों, बच्चों और बुजुर्गों को भी नहीं छोड़ा जा रहा है। यह सब कुछ सनातन से उलट है।
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त्रिज्या जितनी बड़ी परिधि उतनी छोटी
गणित और भुवनकोश विज्ञान विषय पर आधारित इस संगोष्ठी के समापन पर विभागाध्यक्ष प्रो. शत्रुघ्न त्रिपाठी ने बताया कि त्रिज्या की माप जितनी बड़ी रखेंगे परिधि उतना ही छोटी होगी। भुवनकोश एक साइंटिफिक शब्द है जो कि भास्कराचार्य पुस्तक में वर्णित है। प्रो. मनोज कुमार मिश्र ने कहा कि प्रयागराज काे वेदों में विज्ञान, भौतिक और आध्यात्मिक ज्ञान का संगम बताया है। यह ब्रह्मांड ऊर्जा, पदार्थ और चेतना के नियमों को बताता है।
मुख्य वक्ता प्रो. पतंजलि मिश्र ने कहा कि आयुर्वेद, धनुर्वेद, गंधर्ववेद, स्थापत्य वेद वेदों के उपवेद हैं। इसमें संगीत वास्तुकला, रक्षा, चिकित्सा जैसे प्रायोगिक विज्ञान हैं। इलाहाबाद विवि के प्रो. जेएन त्रिपाठी ने कहा कि वेद और प्राचीन ग्रंथों में भी भूकंप को प्राकृतिक भूगर्भीय घटना के रूप में समझाया गया है। प्रो. गिरिजा शंकर शास्त्री ने कहा, भुवनकोश के लिए आर्यभट्ट को ही आधार मानते हैं। 14 भुवनों की चर्चा ज्योतिष में है। इग्नू के क्षेत्रीय निदेशक प्रो. उपेंद्र नभ त्रिपाठी ने पंचतत्त्व इकोलॉजिकल संतुलन की बात की।
अगले 6 महीने या एक वर्ष में बड़ा रिसर्च हो- कुलपति
मुख्य अतिथि विज्ञान भारती, नई दिल्ली के संगठन मंत्री डॉ. शिव कुमार शर्मा ने कहा कि वेद के ज्ञान को निरंतरता के आधार पर जोड़ना ही विज्ञान है। कुलपति प्रो. चतुर्वेदी ने कहा कि दुनियाभर से आए विद्वानों के साथ इस पर शोध की जरूरत है। वैदिक विज्ञान की वेबसाइट पर आउटपुट भी दिखे। अगले 6 महीने या एक साल में बड़ा रिसर्च होना चाहिए। डॉ. सुभाष पांडेय ने कहा कि किसी भी तरह के संकट से निजात के लिए हमारा वैदिक विज्ञान समृद्ध है।
प्रो. ब्रजभूषण ओझा ने कहा कि आधुनिक विज्ञान के साथ वैदिक विज्ञान का होना जरूरी है। इस दौरान महर्षि सांदीपनि राष्ट्रीय वेदविद्या प्रतिष्ठान, उज्जैन के प्रो. हृदय रंजन शर्मा, आरएमएल विधि विवि के कुलपति प्रो. अमरपाल सिंह औश्र प्रो. प्रेम नारायण सिंह सहित कई विद्वानों ने वैदिक और विज्ञान को एक साथ जोड़ने की वकालत की। सत्र संयोजन डॉ. धीरज कुमार मिश्र और धन्यवाद ज्ञापन वैदिक विज्ञान केंद्र के प्रो. विनय कुमार पांडेय ने किया।