बाढ़ का पानी खत्म होते ही चारों तरफ सिर्फ सिल्ट जमा हुआ। गंदगी के अंबार लग गए हैं। अस्सी घाट पर सिल्ट का अंबार लग गया है। कालोनियों की सड़कों पर हर तरफ गंदा पानी जमा है। 10 दिन बाद अपने घरों मे लौटे लोग उसे सवारने में लग गए हैं। तीखी धूप से बजबजा रहे कूड़ों से उठती दुर्गंध से हर कोई परेशान है। घरों से गंदे पानी को मशीन लगाकर निकाल कर लोग सफाई करा रहे हैं, दूसरी ओर सड़कों पर सफाईकर्मी सिर्फ चूने का छिड़काव कर खानापूर्ति करने में जुटे हैं।
डायरिया और वायरल फिवर की चपेट में सैकड़ों लोग आ गए हैं। सत्यम नगर, हरिओम नगर में अभी भी लोग पानी से घिरे हैं। सीवर लाइन नहीं बिछी होने की वजह से पानी नहीं निकल पा रहा है। रमना में प्राथमिक स्वास्थ केंद्र समय से नहीं खुलने से लोगों मे आक्रोश है। पानी उतरने के बाद सड़कें उखड़ कर चौपट हो गई हैं।
कृष्णा नगर, बालाजी नगर, तारा नगर, महादेव नगर, महेश नगर कालोनियों की सड़कों पर हर तरफ गंदा पानी जमा है। 10 दिन बाद बाढ़ खिसकने पर लोग अपने घरों में लौटने लगे। तीखी धूप से बजबजा रहे कूड़ों से निकलती दुर्गंध से लोग परेशान हैं। सामने घाट के दीपक कुमार, बालाजी नगर के सुधीर सिंह, कृष्णा नगर की नीलम तिवारी, महेश नगर के विपुल का कहना है कि वे लोग अपने घरों की सफाई कर रहे हैं लेकिन प्रशासन की तरफ से दवा का छिड़काव नहीं हो रहा है।
बिजली नहीं होने से घरों में जीव-जंतुओं का डर सता रहे है अलग से। राकेश तिवारी ने किराये पर जेनेरेटर मंगा कर समर्सिबल पंप से घर के आसपास भरे सीवरयुक्त गंदे पानी को निकालने का काम शुरू कराया। कई इलाकों में पीने के पानी का संकट गहरा गया है। अस्सी से लेकर सामनेघाट तक सफाई का काम लोग तेजी से कर रहे है। भदैनी के पार्षद गोविंद शर्मा और नगवा पार्षद प्रतिनिधि अपने खर्चे से 30 मजदूरों को लगाकर अपने इलाकों में सफाई करा रहे हैं।
मंडलायुक्त नितिन रमेश गोकर्ण ने नगवा और अस्सी के बाढ ग्रस्त क्षेत्रों का दौरा कर स्थिति की जानकारी ली। प्रभावित इलाकों में सफाई का काम तेज करने का नागरिकों ने उनसे आग्रह किया। इस पर भेलूपुर के जोनल अधिकारी की देखरेख में दो सुपरवाइजर और 40 मजदूरों को लगाकर सफाई कराने का निर्देश दिया गया। राहत शिविरों में अव्यवस्था का झड़ी लगी हुई है। शरणार्थी अपने घरों में जाने के लिए बेताब हैं लेकिन सीलन और पानी होने से अभी हिम्मत गवाही नहीं दे रही है।