पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे के किनारे उद्योग-धंधों के साथ रेल परिवहन को गति देने की कवायद शुरू हो गई है। 16 नवंबर को सुल्तानपुर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा एक्सप्रेस-वे के लोकार्पण के बाद यह सार्वजनिक हो जाएगा। जिससे इस पर परिवहन बढ़ने के साथ डीजल-पेट्रोल की आपूर्ति को देखते हुए कासिमाबाद में इंडियन ऑयल के पेट्रोल पंप की स्वीकृति मिल गई है। इससे पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे से आवागमन करने वाले मालवाहकों और लोगों को बेहद सहूलियत होगी। इसके साथ ही रेल कनेक्टिविटी को भी बढ़ाने की तैयारी है।
जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह ने बताया कि पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे के बगल में करीब 15 मीटर चौड़ी खाली पड़ी जमीन के साथ और जमीनों का अधिग्रहण कर आने वाले दिनों में रेलवे लाइन बिछाने की योजना है। जिससे एक्सप्रेस-वे के किनारे सड़क के साथ रेल परिवहन की सुदृढ़ व्यवस्था निर्मित होगी। जो पूरे जनपद की परिवहन व्यवस्था में ही आर्थिक क्षेत्र में नई ऊर्जा भरने का काम करेगा।
फिलहाल, जनपद में औद्यौगिक क्षेत्र विकसित करने का कार्य किया जा रहा है। इसके लिए हैदरिया से मरदह के बीच जमीन चिन्हित करने का काम चल रहा है। यहां करीब 500 हेक्टेयर जमीनों को अधिग्रहीत करना है। जिसमें कुछ जमीनें गांव समाज और कुछ व्यक्तिगत होंगी। जिले में 52 किमी के एक्सप्रेस-वे पर जगह-जगह औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने की योजना है। जिसमें होटल, रेस्टरोरेंट, पेट्रोल पंप, कोल्ड स्टोरेज, फूड प्रोसेसिंग इकाई को लगाया जाएगा। साथ ही पूर्वांचल का विस्तार सुदूर पूरब तक होने से आगामी दिनों में पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे का विस्तार पटना और बलिया तक होने की योजना है। जिला प्रशासन के मुताबिक जल्द ही इसको लेकर भी जमीन अधिग्रहण का कार्य शुरू होगा।
उद्यमी बोले- संवरेगी अर्थव्यवस्था, मिलेगा रोजगार
उद्योगपति और यूथ रूरल इंटरप्रेन्योर के संयोजक संजय राय शेरपुरिया का कहना है कि पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे से जिले की जीडीपी में काफी बढ़ोत्तरी होगी। फिलहाल जिले का जीडीपी में 18 हजार 800 करोड़ रुपये का योगदान है। पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे के खुलने के बाद जिले की जीडीपी में करीब 26 हजार करोड़ रुपये योगदान होने की संभावना है। जिले में फल और सब्जी के क्षेत्र में निवेश बढ़ेगा और गाजीपुर, मऊ और बलिया में करीब एक लाख रोजगार बढ़ने की संभावना है। उन्होंने कहा कि जिले में करीब 10 लाख टन कच्चे माल का उपयोग प्रोसेसिंग क्षेत्र में नहीं हो पाता। फूड प्रोसेसिंग के क्षेत्र में यहां अपार संभावनाएं है। जिससे क्षेत्र के किसानों की आमदनी दो गुनी बड़े आराम से हो जाएगी।
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अगले दो साल में बदल जाएगा परिदृश्य : डीएम
डीएम मंगला प्रसाद सिंह का कहना है कि जिले का माहौल काफी बदला है। पहले क्राइम के लिए जिले की पहचान थी लेकिन अब विकास का बोलबाला है। विकास को लेकर लोगों का काफी रुझान देखने को मिल रहा है। अगले दो-तीन वर्षों में गाजीपुर का 50 फीसदी परिदृश्य बदल चुका होगा। जो लोग चार-पांच साल पहले गाजीपुर आए होंगे वो जिले को पहचान ही नहीं पाएंगे। कहा कि वाराणसी स्थित बाबतपुर हवाईअड्डे से सैदपुर 35 मिनट में और जिला मुख्यालय डेढ़ घंटे में पहुंचा जा रहा है। जबकि पहले बनारस रूट की सड़के खराब होने से बनारस से गाजीपुर आने में तीन घंटे लग जाते थे।