तीन दिवसीय संगीत महोत्सव बनारसिया
जाने माने ख्याल गायक पद्मभूषण पं. राजन मिश्र पं. साजन मिश्र के सुरों की उमड़-घुमड़ शुक्रवार की रात संगीत रसिकों को भिगो गई। राग मिया की मल्हार से उन्होंने सनन सन बहती पुरवाई की एहसास कराया तो दादुर, पपीहे के विरह की पुकार भी मुर्की और गमक के जरिए पेश की। मौका था बनारस घराने की दो महान हस्तियों को सुरों के जरिए याद करने का। शहनाई के जादूगर भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खान और तबला सम्राट पद्मविभूषण पं. किशन महाराज की जंयती के उपलक्ष्य में चौकाघाट के सांस्कृतिक संकुल में आयोजित तीन दिवसीय संगीतोत्सव ‘बनारसिया’ की दूसरी निशा रागों-बंदिशों की खुशबू से तर-ब-तर हुई।
संकुल में रागगिरी की पेशकश के तहत दूसरी निशा का आगाज स्वरांश मिश्र के गायन से हुआ। इन्होंने राग मालकौश में विलंबित एक ताल की रचना से शुरुआत की। बंदिश के बोल थे-जिनके मन राम विराजे...। इस राग में मध्यलय तीन ताल में दूसरी बंदिश- मग रोकत ऐसो ढीठ लंगरवा...की प्रस्तुति कर उन्होंने वाहवाही बटोरी। फिर द्रुत लय में तराना से विदा ली। इनके साथ तबले पर संगत की पं. राजेश मिश्र ने।
फिर बनारस घराने की ख्याल गायन की उभरती जोड़ी पं.रीतेश मिश्र-पं.रजनीश मिश्र ने मंच संभाला। इन्होंने राग मेघ में मध्य लय झप ताल में निबद्ध बंदिश- प्रबल दल साजिए...पर अलापचारी की। इसके बाद एक ताल द्रुत लय में दूसरी बंदिश के बोल थे कजरा कारे कारे..। इसी राग में आखिरी रचना -बादर की धमक सुनि...से इन्होंने विराम लिया। तबले पर पं. विनीत व्यास ने संगत की।
दीर्घा में बैठे संगीत प्रेमियों में हर किसी को इंतजार था पं. राजन मिश्र-साजन मिश्र का। इनके आते ही हर हर महादेव के जयकारे गूंजने लगे। मिश्र बंधुओं ने राग मियां की मल्हार से उमस से बेचैन दिलों को खूब भिगोया। विलंबित एक ताल की रचना के बोल थे- करीम नाम तेरो...। इसी राग में द्रुत लय तीन ताल की बंदिश -आली उमड़ घन घुमड़ बरसे रे बूंदरिया..बहत पुरवाई सनन सनन सन...। इसके बाद राग भैरवी में भजन की प्रस्तुति की। अब कृपा करो श्रीराम नाम सुखदायी/ तुम कृपा सिंधु रघुनाथ नाथ हो मेरे/ श्रीचरण कमल रज शीश धरे हम तेरे...की प्रस्तुति के दौरान लोग झूमते रहे।