श्री काशी विश्वनाथ धाम अब धीरे-धीरे आकार ले रहा है। भवनों के साथ ही श्री काशी विश्वनाथ मंदिर प्रांगण को भी विस्तार दिया जा चुका है। बावजदू इसके श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के जीर्णोद्धार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले महापुरुषों की प्रतिमाओं के लिए अभी तक स्थान चिन्हित नहीं हो सका है।
महारानी अहिल्याबाई के योगदान को देखते हुए कॉरिडोर में उनकी प्रतिमा लगाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर प्रशासन को निर्देश दिया था। हालांकि धाम का काम कोरोना संक्रमण के कारण सुस्त चल रहा है। 53 फीसदी काम ही अभी तक पूर्ण हुआ है। ऐसे में संभावना है कि कार्य पूर्ण होने के बाद प्रतिमा की स्थापना के लिए स्थान चिन्हित किया जाएगा।
महारानी अहिल्या बाई ने द्वादश ज्योतिर्लिंग आदि विश्वेश्वर बाबा श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर के वर्तमान स्वरूप को आकार देने के अलावा उन्होंने कई कुंडों को नया जीवन दिया और कई घाटों को निर्माण कराया। उनकी आस्था को सम्मान और काशी के पुनर्निर्माण में अहिल्याबाई के योगदान को देखते हुए कॉरिडोर में उनकी प्रतिमा लगाने की योजना है। हालांकि अभी तक इसके लिए स्थान चिन्हित नहीं किया जा सका है।
आदि शंकराचार्य और महाराजा रणजीत सिंह का भी श्री काशी विश्वनाथ मंदिर को भव्य और एक अलग पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। महारानी अहिल्याबाई होलकर इंदौर की महारानी थीं। अहिल्याबाई ने देश भर के प्रसिद्ध तीर्थों और स्थानों में मंदिर बनवाए। उन्होंने मणिकर्णिकाघाट पर बाबा तारकेश्वर महादेव के मंदिर निर्माण भी कराया था।
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में हुई जयंती पर पूजा
श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर का निर्माण कराने वाली महारानी अहिल्या बाई होलकर की जयंती के शुभ अवसर पर सोमवार को श्रृंगार, भोग, आरती के बाद बाबा के गर्भगृह में विशेष पूजा हुई। मंदिर के अर्चक ने बताया कि महारानी की जयंती के अवसर पर विशेष पूजा शृंगार हुआ। बिल्वपत्र व कमल पुष्प से सहस्रार्चन तथा केशरयुक्त 51 किलो दूध से बाबा विश्वनाथ का अभिषेक किया गया। इस दौरान उपस्थित भक्त व कर्मचारियों में प्रसाद वितरित किया गया।