नोटबंदी के बाद कैश की कमी से आम लोग जहां रोजाना परेशानियों से दो-चार हो रही है, वहीं बैंक अधिकारी नए संकट का सामना कर रहे हैं। आरबीआई ने जिले में अब तक करीब 100 करोड़ के स्वाइल नोट की आपूर्ति की है। इन खस्ताहाल नोटों से संक्रमण हो रहा है। चिकित्सकों के मुताबिक ये नोट सेहत के लिए बेहद खतरनाक हैं। बैकिंग सूत्रों की मानें तो सामने घाट स्थित एक बैंक के सहायक शाखा प्रबंधक, गोदौलिया स्थित एक बैंक पर कैशियर समेत अब तक पांच से अधिक लोग इन नोटों से उत्पन्न संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं।
एक ओर जहां आरबीआई की ओर से नई करेंसी नहीं आ रही है वहीं घंटों लाइन में लगने के बाद लोगों को कटे-फटे, सड़े-गले और पुराने नोट मिल रहे हैं। कैश की कमी को पूरा करने के लिए अब तक करीब 100 करोड़ के ऐसे नोट बांटे जा चुके हैं। इनमें से 30 करोड़ के अधिक के स्वाइल नोट ग्रामीण बैंक को बांटे गए हैं। करेंसी चेस्ट में सुरक्षित रखने के लिए इन नोटों पर केमिकल लगाया जाता है। कैश की कमी होने पर इन नोटों की गड्डी को अब बैंकों में नए सिरे से भेजा जा रहा है। नोटों की गड्ड्ी से दुर्गंध आ रही है। ऐसे तमाम नोटों को गिनना और उन्हें ग्राहकों को देना अधिकारियों-कर्मचारियों की सेहत पर असर डाल रहा है।
घंटों लाइन में लगने के बाद लोगों को 10-20 और 50 रुपये के सड़े-गले, कटे-फटे नोटों की गड्डी मिल रही है। गुरुवार को काशी गोमती संयुत ग्रामीण बैंक की लहरतारा शाखा पर कुछ ग्राहकों ने ऐसे 10 रुपये की गड्डी को वापस कर दिया। दूसरी ओर बैंक की ओर से ऐसे नोटों को अलग प्लास्टिक में रखा गया है, जिन्हें लोग वापस किए हैं।
काशी गोमती संयुत ग्रामीण बैंक और आल इंडिया ग्रामीण बैंक आफिसर्स एसोसिएशन की ओर से भी इसकी शिकायत आरबीआई के उप महाप्रबंधक (लखनऊ) समेत अन्य अधिकारियों से की जा चुकी है। महामंत्री सुभाष चंद्र तिवारी ने बताया कि 10-20 के सबसे रद्दी नोट बैंक को दिए गए हैं। कर्मचारी तो इससे परेशान हैं ही, उन्हें ग्राहकों के गुस्से का भी सामना करना पड़ रहा है।