नोटबंदी के महीने भर बीतने के बाद भी कैश को लेकर हालात जस के तस हैं। आरबीआई की ओर से मांग के अनुरूप नोटों की आपूर्ति न कर पाने से संकट और बढ़ गया है। न तो बैंकों से नोट मिल रहे हैं और न ही एटीएम से। सब जगहों से लोगों को निराश लौटना पड़ रहा है। लगातार लाइन में लग-लग कर लोग इस कदर नाराज हो रहे हैं कि बैंकों में लगे नो कैश के बोर्ड उखाड़ने, कर्मियों पर गुस्सा उतारने की घटनाएं होने लगी हैं। उधर, बुधवार को जौनपुर में ग्रामीण बैंक के कैशियर के साथ मारपीट की घटना से बनारस के बैंक अधिकारी-कर्मचारी डर गए हैं।
इस बीच बृहस्पतिवार को आरबीआई की ओर से कई बैंक में करेंसी भेजी गई। करेेंसी चेस्ट से बैंकों को रुपये मिलने की जानकारी मिलने पर बैंकों और एटीएम पर फिर भीड़ उमड़ पड़ी। बैंकों में कुछ कैश आने से राहत हुई लेकिन दोपहर में ही कैश खत्म हो गया। प्रभारी डीएम/सीडीओ पुलकित खरे ने बताया कि आरबीआई को पत्र भेजकर कैश संकट के बारे में बताया गया था। उन्होंने कुछ कैश भेजा है और कुछ कैश आ रहा है। दूसरी ओर बैंक अधिकारियों की मानें तो यही स्थिति रही तो पूरी तरह से स्थिति सामान्य होने में कम से कम एक महीने का समय और लगेगा।
आठ नवंबर को सरकार के नोटबंदी के फैसले के बाद अपने पास पड़े पुराने नोटों को तो लोगों ने बैंकों-डाकघरों में जाकर बदल और जमा कर दिया लेकिन उसके बदले में मांग के अनुरूप नई करेंसी न के बराबर मिली। कैश की कमी की वजह से न केवल नवंबर बल्कि दिसंबर महीने में भी कई लोग बच्चों की फीस, मकान किराया, दूध वाले का हिसाब आदि खाद्य सामग्रियाें की जरूरत उधारी पर पूरी कर रहे है।
बीएचयू के अर्थशास्त्र भवन में गुरुवार को ‘विमुद्रीकरण : उद्देश्य, समस्याएं एवं समाधान’ विषय पर गोष्ठी हुई। मुख्य अतिथि मणिपुर केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आद्या प्रसाद पांडेय ने कहा कि यह दीर्घकालिक कदम है। शिक्षण संस्थाओं को आम नागरिकों को इसके मूल उद्देश्यों से परिचित कराना चाहिए। ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के प्रति लोगों को जागरूक करने की जिम्मेदारी विश्वविद्यालयों को निभानी होगी। अध्यक्षता करते हुए हेड प्रो. एआर प्रसाद ने कहा, ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के लिए जागरुकता अभियान चलाया जाएगा। संचालन डॉ. अनूप मिश्रा व धन्यवाद ज्ञापन प्रो. एके गौर ने किया।
कैश की कमी के कारण शहर के 40 प्रतिशत एटीएम काम नहीं कर पा रहे हैं। कई एटीएम कैलीब्रेट नहीं हो पाए हैं तो कबीरचौरा मंडलीय अस्पताल के निकट यूनियन बैंक, बैंक आफ इंडिया सहित ग्रामीण इलाकों में यूनियन बैंक, सेंट्रल बैंक आदि के एटीएम नोटबंदी के बाद से ही बंद पड़े हैं। जलकर की अदायगी अब भी 500 के पुराने नोट से कर सकते हैं। जलकल विभाग के सचिव आरपी सक्सेना ने बताया कि पुराने पांच सौ के नोट से 12 दिसंबर तक जलकर जमा किया जाएगा। इसके लिए शनिवार और रविवार को जलकल कार्यालय और वसूली सेंटर खुले रहेंगे।
नोटबंदी के चलते एक महीने से रुपयों के लिए जूझ रही जनता को फिलहाल कोई राहत मिलती नहीं दिख रही। बैंकों में रुपये नहीं हैं तो एटीएम लगातार बंद चल रहे हैं। डाकघरों में भी कैश की किल्लत जारी है।
सेवापुरी के बैंक आफ बड़ौदा में सुबह से लंबी कतार लगी रही। यहां 332 लोगों को चार-चार हजार रुपये दिए गए। इसके बाद रुपये खत्म होने पर बाकी लोगों को निराश लौटना पड़ा। चौबेपुर स्थित इलाहाबाद बैंक में चार हजार, ओरिएंटल बैंक और एसबीआई में लोगों को महज दो-दो हजार रुपये लोगों को दिए गए। कछवां रोड में सारे बैंकों के एटीएम पर ताले लटके रहे। रोहनिया क्षेत्र के मोहनसराय स्थित काशी गोमती संयुत ग्रामीण बैंक में एक बजे रुपये खत्म हो जाने से बहुत से लोगों को निराश लौटना पड़ा।
इसी तरह चिरईगांव क्षेत्र के जाल्हूपुर, गौराकला और लेढ़ूपर स्थित काशी गोमती संयुत ग्रामीण बैंक की शाखाओं में दोपहर बाद ही कैश समाप्त हो गया। एसबीआई जाल्हूपुर में शाम तक कतार लगी रही जबकि क्षेत्र के सारे एटीएम बंद रहे। दानगंज के नियारडीह, बेला और चोलापुर स्थित काशी गोमती संयुत ग्रामीण बैंक में कैश ही नहीं था। यूनियन बैंक दानगंज में 600 लोगों को भुगतान किया गया। आराजीलाइन के जक्खिनी स्थित बैंकों में लंबी कतारें लगी रहीं। हालांकि जयापुर के सिंडिकेंट बैंक और यूबीआई में ग्राहकों को भुगतान किया गया। चोलापुर स्थित स्टेट बैंक में लाइन में खड़े एक फौजी ने हंगामा कर दिया। उसका गुस्सा देख वहां मौजूद पुलिसकर्मी भी कुछ बोलने की हिम्मत नहीं जटा सके। मिर्जामुराद स्थित डाकघर में चार दिन से कैश न होने के कारण लोग परेशान हैं।