पहाड़ों पर भारी वर्षा की चेतावनी के बाद बाढ़ की आशंका से तटीय इलाकों में लोगों की पेशानी पर बल पड़ गए हैं। उधर, दोबारा बढ़ाव शुरू होने के बाद गंगा एक बार फिर स्थिर हो गई है लेकिन निचले स्तरों में पानी घुसने लगा है। इससे दुश्वारियां बढ़ गई हैं। काशी में गंगा के बढ़ाव के बाद सामान्य जन जीवन पर असर पड़ने लगा है। दोबारा अगर तेज प्रवाह आने लगा तो गंगा और उसकी सहायक नदियों में बाढ़ आ सकती है।
काशी में शनिवार को गंगा 67.81 मीटर तक पहुंचकर स्थिर हो गई। इस प्रवाह के बाद सराय मोहाना संगम से वरुणा के निचले स्तरों मेें पानी घुसने लगा है। कोनिया, नक्खीघाट, सरैया की बस्तियों में पानी घुस गया है। इससे लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। दर्जनों परिवार गृहस्थी का सामान हटाने में जुट गए हैं। लोग अपने रिश्तेदारों या फिर परिचितों के यहां शरण ले रहे हैं। बाढ़ की आशंका से परेशान वरुणा किनारे के सैकड़ों परिवार किराए का मकान तलाशने में जुट गए हैं।
इधर, गंगा किनारे भी मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। शनिवार को चेतसिंह किला द्वार के पास गंगा पहुंच गई। शीतला मंदिर में मां गंगा पहले से ही हिलोरें मार रही हैं। गंगा में बढ़ाव से घाट किनारे की तमाम साड़ी की दूकानें, पूजा-प्रसाद के कारोबार प्रभावित हो गए हैं। सबसे अधिक परेशानी हो रही है श्मशान घाटों पर अंतिम संस्कार को लेकर। हरिश्चंद्र घाट पर अब चिता लगाने के लिए प्लेटफार्मों पर जगह नहीं बची है। किनारा जलमग्न होने के बाद अब गलियों में चिताएं जलाई जा रही हैं। मणिकर्णिका महाश्मशान पर छतों पर शव जलाए जा रहे हैं।