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46 जलतीर्थों का तो नामोनिशां ही मिट गया

Sun, 17 Jul 2016 01:47 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, वाराणसी
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पुष्कर तालाब में बजबजाता सीवेज।
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काशी में आस्था के प्रतीक जलतीर्थ संकट में हैं। ‘धूल धूसरित धरोहर’ शृंखला के जरिये पौराणिक कुंडों की खोज यात्रा के दौरान ‘अमर उजाला’ ने सात से अधिक ऐसे जलतीर्थों को पता लगाया जिन्हें पाटकर कॉलोनियां बना दी गई हैं या ज्यादातर हिस्सा कब्जा कर लिया गया है। इनमें शुभोदक कुंड, गुरुधाम कुंड, दुर्वासा कुंड, धन-धानेश्वर कुंड, माता कुंड, हंस तीर्थ कुंड, सूरज कुंड के नाम प्रमुख हैं। एक भी जल तीर्थ ऐसा नहीं मिला जिसका जल आचमन के योग्य बचा हो।
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इतना ही नहीं, पौराणिक महत्व के 46 ऐसे जल तीर्थों का पता चला, जिनका नामोनिशां ही मिट चुका है। अब ये कुंड काशी में अतीत का पन्ना बन चुके हैं। हालांकि ‘अमर उजाला’ में यह शृंखला प्रकाशित होने के बाद प्रशासन ने कुछ कुंडों के संरक्षण के लिए पहल भी की। इससे आशा बंधती है कि आगे भी इनकी ओर ध्यान दिया जाएगा। फिलहाल हम इस शृंखला को यहीं विराम देते हैं, इस उम्मीद के साथ कि आने वाले दिनों में ऐसी ही किसी और मुहिम में भी आपके सुझावों की अनमोल थाती की सौगात हमें मिलती रहेगी...।

मान्यताओं और रीति-रिवाजों की काशी में पौराणिक कुंडों पर कहीं मेले लगते हैं तो कहीं मुहल्ले मशहूर हैं। परंपराओं के निर्वाह से लेकर जल निकासी की व्यवस्था के विशेषज्ञों का कहना है कि कभी इन कुंडों का निर्माण जल निकासी के मॉडल के रूप में किया गया था। यही वजह थी कि बारिश के दिनों में भी न कहीं जल भराव होता था न तो गंदगी फैलती थी लेकिन अब कुछ मिनटों की बरसात में ही स्थिति नारकीय हो जाती है।
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कुंडों के अस्तित्व से खिलवाड़ सिर्फ भू-माफिया ने ही नहीं किया, सरकारी विभाग भी इसमें आगे रहे हैं। नदेसर तालाब की 5.75 एकड़ भूमि पर वीडीए ने सड़क बनवा ली तो दस हजार वर्गफीट में उपासना स्थल और 300 वर्गफीट पर देव स्थान बनवा लिया गया है। माताकुंड तालाब पर लल्लापुरा पुलिस चौकी का निर्माण करा दिया गया है। ओंकालेश्वर महादेव स्थित तीर्थकुंड आराजी नं. 233 पर वीडीए की एकता कालोनी बस गई है। हंसतीर्थ की आराजी नं. 1867, 1868 पर भारत संचार निगम लिमिटेड का कार्यालय और टावर है। तुलसीपुर के कुंड में सामुदायिक केंद्र का भवन बनवा दिया गया है।

छावनी क्षेत्र में पाशपाणि मंदिर के सामने जिस कुंड को नेपाल की महारानी ने 1130 में बनवाया था, वहां अब मल्टीपरपज ग्राउंड बन गया है। इसी तरह गुरुधाम के दो कुंडों को पाटकर कॉलोनी और पार्क बना दिया गया है। नदेसर तालाब, इंगलिशिया लाइन तालाब, 10वीं सदी का ओंकालेश्वर महादेव कुंड, शुभोतक कूप, धूपचंडी का दुर्वासा कुंड, धन-धानेश्वर तीर्थ कुंड, सोनभद्र कुंड, च्यावनेश्वर तीर्थ कुंड, चक्रकुंड समेत पौराणिक महत्व के कई कुंडों को रिस्टोर कराने का आदेश सुप्रीम कोर्ट ने दिया था लेकिन स्थिति जस की तस है। काशी की इन धरोहरों का संरक्ष्‍ाण जल्द न हुआ तो ये भी अतीत की बात बन जाएंगे।
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