वाराणसी। पूर्वांचल के गाजीपुर और वाराणसी के तीन प्राचीन व ऐतिहासिक मंदिरों और खंडहर हो चुके स्थानों को संरक्षित किया जाएगा। इसके लिए पर्यटन और पुरातत्व विभाग ने मास्टर प्लान तैयार किया है। राजातालाब अश्वारी स्थित शिव मंदिर, अर्दली बाजार स्थित गोपाल लाल विला और गाजीपुर के पाली स्थित राधा कृष्ण मंदिर शामिल हैं। इन मंदिरों और इमारतों की जर्जर दीवारों को मजबूत बनाते हुए इनके भीतर पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
अश्वारी स्थित शिव मंदिर
वाराणसी के राजातालाब क्षेत्र के अश्वारी स्थित शिव मंदिर का इतिहास पेशवाओं से जुड़ा है। मंदिर की बनावट, विशेषकर इसके शिखर और नक्काशीदार पत्थर, उन उत्तर भारतीय मंदिरों की याद दिलाते हैं, जिनका पुनर्निर्माण पेशवाओं ने 290 वर्ष पहले वाराणसी के धार्मिक पुनरुद्धार के समय कराया था। मंदिर के गर्भगृह और बाहरी दीवारों पर पेशवा कालीन निर्माण शैली स्पष्ट रूप से झलकती है। यह उस दौर की याद दिलाता है जब पेशवाओं ने काशी को सांस्कृतिक रूप से सुदृढ़ करने के लिए शहर के बाहरी इलाकों तक मंदिरों का जाल बिछाया था।
गोपाल लाल विला
अर्दली बाजार, एलटी कॉलेज परिसर में स्थित गोपाल लाल विला आज खंडहर में तब्दील हो चुका है। इस भवन के खंडहर लगभग 50 वर्गमीटर के क्षेत्रफल में स्थित हैं। इसके भीतर छोटे-छोटे कमरे बने हुए हैं। फिलहाल इस संपत्ति पर शिक्षा विभाग का मालिकाना हक है। यहां स्वामी विवेकानंद ने अपने अंतिम दिनों में लगभग सवा महीने तक प्रवास किया था। वर्ष 1902 में जब विवेकानंद बीमार हुए, तब उन्हें यहीं पर स्वास्थ्य लाभ मिला था।
गाजीपुर का राधा कृष्ण मंदिर
400 वर्ष पुराने मंदिर का निर्माण 56 खंभों के साथ किया गया है। पुरनिए बताते हैं कि मंदिर का निर्माण राजस्थानी शैली में हुआ है। मंदिर में राधा कृष्ण की अष्टधातु की मूर्ति मौजूद है। ब्रिटिश हुकूमत के दौरान ब्रिटानी बैंक में मंदिर के नाम से कुछ पैसा भी जमा था, जिसका आज भी कुछ ब्याज मिलता है। वर्तमान में मंदिर जर्जर होने के कारण इसका गेट अधिकतर बंद ही रहता है। मंदिर को संरक्षित करने के बाद यहां फिर से धार्मिक पर्यटन को गति मिलेगी।