नगर निगम की हद दर्जे की लापरवाही के कारण शहर में करोड़ों की संपत्ति पर कब्जा हो गया। नगर निगम के अधिकारियों-कर्मचारियों की मिलीभगत से भूमि और भवन पर पहले लोग काबिज हो गए और बाद में मामला कोर्ट में चला गया। कोर्ट में जाने के बाद नगर निगम प्रशासन ठीक से पैरवी भी नहीं कर रहा जिसके चलते कब्जा नहीं ले पा रहा है।
इसी का नतीजा है कि मैदागिन स्थित टाउनहाल से लेकर गांधी भवन तक कब्जा हो गया है। वहां लाइब्रेरी पर अरसे से ताला लगा है। एक कमरे में निजी संस्था का कार्यालय खुल गया। सरकारी भवन पर कब्जा हो गया है और निगम के अधिकारी उसे मुक्त नहीं करा सके। निगम के तहसीलदार अविनाश कुमार का कहना है कि शहर में 40 से अधिक निगम की भूमि और भवनों पर कब्जा है।
उसे चिह्नित कर 70 मुकदमे दर्ज कराए गए है। यह तो निगम के रिकार्ड के मुताबिक है जबकि निगम के सूत्रों के अनुसार दशाश्वमेध, सुदामापुर, इंग्लिशियालाइन में करोड़ों की संपत्ति पर नगर निगम की मिलीभगत से कब्जा हो गया। सूत्रों का तो यह भी कहना है कि निगम के कर्मचारी दस्तावेजों में भी हेराफेरी कर उसे रिकार्ड से गायब करा चुके हैं।
ऐसे शहर के कई इलाकों में धड़ल्ले से कब्जा हो गया और नगर निगम अब तक मुक्त नहीं करा सका। मामले में नगर आयुक्त श्रीहरि प्रताप शाही ने कहा कि नगर निगम की जमीन पर जहां अवैध कब्जे हैं, उसे सूचीबद्ध कराया जाएगा। टाउनहाल भवन से अवैध कब्जा हटाया जाएगा। मामला कोर्र्ट में लंबित है। कोर्ट से विवाद सुलझाकर उसे खाली करा दिया जाएगा।