सुंदरीकरण के बाद शहर के कुंड उपेक्षा के शिकार हो रहे हैं। कई कुंडों पर हुई पेंटिंग खराब हो गई है। इसके अलावा कई जगहों पर गंदगी पड़ी है। पितरकुंडा के आसपास ऐसा देखा जा सकता है। इसी प्रकार रामकुंड के पास भी समस्या है। नदेसर तालाब, पांडेयपुर तालाब, चकरा, सोनभद्र तालाब, चितईपुर तालाब को सुंदर बनाया गया है। पक्के निर्माण होने के चलते कई जगहों पर सुंदरीकरण नहीं हो पा रहा है। सदन की बैठक में मेयर अशोक कुमार तिवारी ने बैठक कर नगर निगम के अधिकारियों को निर्देश दिए कि कुंडों को बेहतर किया जाए।
शहरी क्षेत्र के छोटे-बड़े मिलाकर 138 कुंड-तालाब हैं। इसमें कुछ तालाबों पर अतिक्रमण है। कई तालाब का सुंदरीकरण कराया गया है। कुंडों के पुराने सोता को खोला जाएगा ताकि कुंडों में प्राकृतिक रूप से जल आता रहे। कई कुंडों में सोते पर मिट्टी जमा हो गई है। इनकी सफाई कराकर सोता खोलने से प्राकृतिक जल से कुंडों का लबालब रखने की तैयारी की गई है। कुंडों का सोता खोलने के पीछे प्रमुख मंशा भूगर्भ जलस्तर बढ़ाने की है। इनमें पानी की मात्रा होने से भूजल स्तर बढ़ेगा। यही नहीं पर्यटन के लिहाज से भी इन कुंडों और तालाबों का महत्व बढ़ जाएगा। सुंदरीकरण होने से इन तालाबों के पास दूर दराज से पर्यटक भी आएंगे। तालाबों के चारों तरफ पक्का निर्माण कराया जाएगा। इनके आसपास बैठने वालों के लिए बेंच बनाए जाएंगे। फव्वारे भी लगाए जाएंगे।