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Varanasi News: पीएचसी चिरईगांव और सीएचसी नरपतपुर में विशेषज्ञों की कमी

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मुख्यमंत्री के निर्देश पर सोमवार दोपहर डॉ. गौतम कुमार विश्वकर्मा के नेतृत्व में लखनऊ से आई स्टेट टीम ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) चिरईगांव का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान टीम ने विशेष रूप से मातृ मृत्यु दर (एमएमआर) रिपोर्ट का भौतिक सत्यापन किया। अधिकारियों ने प्रसव (डिलीवरी) से संबंधित सभी महत्वपूर्ण अभिलेखों, सरकारी रजिस्टरों और अस्पताल की ओर से दी जा रही स्वास्थ्य सेवाओं की जांच की।
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निरीक्षण के दौरान राज्य स्तरीय अधिकारियों ने प्रसव सेवाओं की गुणवत्ता, प्रसूति व मातृ स्वास्थ्य संबंधी अन्य व्यवस्थाओं और अस्पताल के रिकॉर्ड्स के रखरखाव की स्थिति का अवलोकन किया। जांच के बाद टीम ने उपस्थित स्वास्थ्य कर्मियों को सख्त निर्देश दिए कि वे शासन की गाइडलाइन के अनुरूप ही कार्य करें और सभी अभिलेखों को अपडेट रखें। अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश स्तर पर सभी पीएचसी और सीएचसी का सघन निरीक्षण किया जा रहा है ताकि मातृ मृत्यु दर न्यूनतम की जा सके।

पीएचसी चिरईगांव में जांच पड़ताल पूरी करने के बाद स्टेट टीम सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) नरपतपुर पहुंची। यहां भी टीम ने डिलीवरी से जुड़े दस्तावेजों और चिकित्सा व्यवस्थाओं की व्यापक समीक्षा की। समीक्षा के दौरान यह बात सामने आई कि मातृ मृत्यु दर को कम करने और गंभीर मामलों को संभालने के लिए अस्पतालों में स्त्री रोग विशेषज्ञ (गाइनकोलॉजिस्ट), एनेस्थेटिस्ट और शिशु रोग विशेषज्ञ डॉक्टरों की तत्काल आवश्यकता है। जांच में पीएचसी चिरईगांव और सीएचसी नरपतपुर दोनों ही बड़े केंद्रों पर इन विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी मिली। ऐसी स्थिति में अस्पतालों में प्रसव सेवाएं मुख्य रूप से स्टाफ नर्सों के भरोसे ही संचालित हो रही हैं। हालांकि वर्तमान में दोनों अस्पतालों में महिला चिकित्सक तैनात हैं। निरीक्षण के दौरान स्टेट टीम के साथ जनपद के सहायक शोध अधिकारी (एआरओ) अनुराग, अनुराधा, वसंत के साथ-साथ पीएचसी प्रभारी डॉ. मनोज कुमार वर्मा तथा सीएचसी प्रभारी डॉ. राजनाथ मौजूद रहे।
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