प्रसिद्ध कथाकार डॉ. काशीनाथ सिंह ने कहा कि फणीश्वर नाथ रेणु को बड़ा कथाकार किसी आलोचक ने नहीं, बल्कि पाठकों ने बनाया। बड़ा लेखक वह होता है जो पहले से चली आ रही धारा को छोड़ता है, मोड़ता है और तोड़ता है ना कि उसे ढोता है। वह रविवार को कबीरमठ मूलगादी में आयोजित अखिल भारतीय प्रगतिशील लेखक संघ की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक व संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे।
फणीश्वर नाथ रेणु पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कबीर मठ के महंत आचार्य विवेक दास ने कहा कि रेणु पर कबीरपंथ का प्रभाव था। आलोचक वीरेंद्र यादव, इप्टा के राष्ट्रीय महासचिव राकेश ने कहा कि रेणु अपने लेखन में सबसे अधिक महत्व अनाम लोगों को देते हैं। आलोचक चौथी राम यादव, कथाकार रणेंद्र, प्रो. आशीष त्रिपाठी, प्रो. नीरज खरे ने भी अपने विचार रखे। दो महत्वपूर्ण लेखकों अली जावेद तथा ईशमधु तलवार की असामयिक मृत्यु पर शोक व्यक्त किया गया। इस दौरान वंदना चौबे, संजय श्रीवास्तव, श्रीप्रकाश शुक्ला, शिवकुमार पराग तथा डॉ. गोरखनाथ आदि रहे।
देश भर में 75 स्थानों से निकाली जाएंगी सांस्कृतिक यात्राएं
प्रगतिशील आंदोलन के 85 वर्षों के इतिहास में प्रगतिशील लेखक संघ की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की पहली बार बनारस में बैठक हुई है। प्रदेश अध्यक्ष डॉ. गया सिंह ने बताया कि देश भर में 75 स्थानों से सांस्कृतिक यात्राएं निकाली जाएंगी। इसमें साहित्यकार, संत और कलाकारों की जन्मस्थली व कार्यस्थली को शामिल किया गया है।