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पुराने भवन भी बन सकते हैं भूकंपरोधी

Tue, 28 Apr 2015 02:27 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, वाराणसी
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कहते हैं ‘जब जागो तभी सवेरा’। काशी से करीब छह सौ किलोमीटर की दूरी पर नेपाल में आए भूकंप और यहां महसूस हुए झटकों को शहरवासियों को भी गंभीरता से लेने की जरूरत है। वाराणसी विकास प्राधिकरण क्या कार्ययोजना बनाएगा, क्या प्रशासनिक इंतजाम होंगे, इसे भूलकर खुद और परिवार की सुरक्षा के लिए पुराने मकानों को हर हाल में भूकंपरोधी से तकनीक से लैस करना होगा। ‘रेट्रोफिटिंग’ तकनीक के सहारे यह संभव है। इसके बारे में भारतीय मानक ब्यूरो से मान्यता प्राप्त कोई भी सिविल इंजीनियर (स्ट्रक्चरल) जानकारी दे सकता है।
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नगर निगम के रिकार्ड के अनुसार शहर में एक लाख सत्तर हजार से अधिक मकान हैं। इनमें से कितने भूकंपरोधी तकनीक से लैस हैं, इसकी जानकारी विकास प्राधिकरण को भी नहीं है। स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग के जानकारों के अनुसार ‘रेट्रोफिटिंग’ से पुराने मकान जिनमें पिलर नहीं हैं, उन्हें भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदा से सुरक्षित किया जा सकता है। इसके तकनीक के तहत पुराने भवन के दरवाजों और खिड़कियों के ऊपरी हिस्सों में जहां से छत शुरू होती है, लिंटर बीम डाले जाते हैं। भवन की दीवारों के कोनों को लिंटर बीम के जरिये आपस में जोड़ दिया जाता है। लिंटर बीम में लोहे की छड़ों और स्टील का प्रयोग किया जाता है। इससे मकान को मजबूती मिलती है आैर भूकंप के दौरान 80 से 85 फीसदी तक नुकसान की आशंका कम हो जाती है और झटके लगने पर भी पिलर वाले मकान की तरह ये भी हिलते हैं।
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