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नई पीढ़ी को देना होगा संस्कार और सामाजिकता का आचरण

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पद्मविभूषण पं. छन्नूलाल मिश्र ने कहा कि विश्वगुरु बनने के लिए सनातन धर्म का अभ्युदय बेहद जरूरी है। आने वाली पीढ़ियों में संस्कार, व्यवहार और सामाजिकता का आचरण डालना होगा। दिग्भ्रमित समाज को सही दिशा देने की जिम्मेदारी हर किसी को उठानी होगी तभी परिवर्तन की बयार बह सकती है।
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वह सोमवार को महमूरगंज स्थित शृंगेरी मठ में ब्रह्मराष्ट्रएकम के समापन समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। काशी विद्वत परिषद के महामंत्री प्रो. रामनारायण द्विवेदी ने कहा कि राजनीति पर धर्म का अंकुश बेहद जरूरी है। शस्त्र और शास्त्र का अंकुश राजनीति को सकारात्मक दिशा देने के लिए आवश्यक है। पहले सत्र में विवेक चेतन, रामप्रकाश दुबे ने ब्रह्मराष्ट्र एकम की धारणा को समाज में जागृत करने का तरीका बताया।
दूसरे सत्र में अमरेंद्र मिश्र, कृष्ण कुमार उपाध्याय, हेमंत सिंह ने फ्यूजन बैंड की प्रस्तुति दी। इसके बाद सरोज वर्मा का गायन हुआ। इसके बाद शिल्पी पाल, रत्नेश अमलेश शुक्ला ने अपनी गायन कला से दर्शकाें को विभोर किया। इस दौरान प्रिया मिश्रा, भावना विश्वास, शारदा मिश्रा, रजनी, नमिता कुशवाहा, प्रणाम प्रकाश दुबे, कामेश्वर उपाध्याय आदि मौजूद रहे।
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