वाराणसी। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड समेत पहाड़ी इलाकों में हुई जोरदार बारिश के बाद गंगा के जलस्तर में बढ़ाव से शनिवार को गंगा घाटों का संपर्क टूटने का सिलसिला शुरू हो गया। दोपहर बाद दो प्रमुख घाटों का संपर्क टूट गया। इससे घाटों के रास्ते आवाजाही प्रभावित हो गई। मणिकर्णिका महाश्मशान का निचला प्लेटफार्म डूबने से अंतिम संस्कार अब ऊपर की सीढ़ियों के प्लेटफार्म पर किया जाने लगा है। हालांकि शाम को बढ़ाव की गति धीमी पड़ने लगी लेकिन घाट किनारे के लोग बाढ़ की आशंका से सतर्क हो गए हैं। नावों की मरम्मत में तेजी आ गई है और लंगर बांधे जाने लगे हैं।
बारिश के बाद पहाड़ी नालों और सहायक नदियों से होकर गंगा में लगातार पानी आ रहा है। इससे जलस्तर में वृद्धि होने लगी है। केंद्रीय जल आयोग ने शनिवार की शाम गंगा का जलस्तर 62.39 मीटर रिकार्ड किया। यह जलस्तर अभी खतरे के निशान से करीब 10 मीटर नीचे है लेकिन घाटों का संपर्क टूटने लगा है। दशाश्वमेध घाट और राजेंद्र प्रसाद घाट के उत्तर में मान मंदिर और मीर घाट के बीच का
रास्ता डूब गया। अब डोमराजा के भवन के पास से लोग नाव के सहारे ही घाट पार हो रहे हैं। या फिर घुटने के ऊपर पानी से होकर जाना पड़ रहा है। इसी तरह ललिता घाट से मणिकर्णिका घाट का भी संपर्क टूट गया। जलासेन घाट पर भी घुटने तक पानी लगा है। गंगा में बढ़ाव को देखते हुए घाट किनारे के तीर्थ पुरोहितों ने छतरियों और चौकियों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाना शुरू कर दिया है। सामने घाट पर महामृत्युंजय महादेव मंदिर की सीढ़ी पर गंगा ने दस्तक दे दी है। इससे नगवा, मलहिया टोला, मदरवा, सामने घाट, मारुतिनगर के लोग बाढ़ की आशंका को लेकर सहम गए हैं।