वाराणसी। ज्ञानवापी प्रकरण में स्वयंभू ज्योतिर्लिंग काशी विश्वनाथ (विश्वेश्वर) के वाद मित्र एवं अधिवक्ता विजय शंकर रस्तोगी ने प्रदेश सरकार से पूर्व की भांति निःशुल्क सशस्त्र सुरक्षा बहाल करने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि उनकी सहमति के बिना सुरक्षा व्यवस्था को निजी व्यय से जोड़ दिया गया और बाद में दो लाख रुपये से अधिक की धनराशि जमा करने का नोटिस भेज दिया गया। इस संबंध में उन्होंने गृह विभाग को पत्र भेजकर सुरक्षा शुल्क से मुक्त किए जाने की मांग की है।
रस्तोगी ने पत्र में कहा है कि वह वर्ष 2019 से न्यायालय द्वारा नियुक्त वाद मित्र के रूप में ज्ञानवापी मामले की पैरवी कर रहे हैं। उनके अनुसार यह अत्यंत संवेदनशील और चर्चित मामला है, जिसके कारण उन्हें लगातार जान-माल का खतरा बना हुआ है। इसी खतरे को देखते हुए शासन ने वर्ष 2019 में उन्हें एक सशस्त्र सुरक्षाकर्मी निःशुल्क उपलब्ध कराया था। अप्रैल 2026 में स्थानीय अभिसूचना इकाई (एलआईयू) के माध्यम से उन्हें जानकारी मिली कि शासनादेश के तहत उनकी सुरक्षा व्यवस्था की अवधि छह माह के लिए बढ़ा दी गई है, लेकिन इसके लिए 25 प्रतिशत निजी व्यय निर्धारित किया गया है। उन्होंने इसे सिद्धांतों के विपरीत बताते हुए 2.08 लाख रुपये के कथित सुरक्षा व्यय से मुक्त करने तथा पूर्व की भांति निःशुल्क सुरक्षा बहाल करने की मांग की है।