लखनऊ में आतंकी संगठन अलकायदा समर्थित अंसार गजवातुल हिंद से जुड़े दो आतंकियों की गिरफ्तारी बाद एनआईए सहित अन्य सुरक्षा एजेंसियों की नजर पूर्वांचल के आजमगढ़ स्थित सरायमीर में आकर टिक गई है। एक दशक पूर्व बाटला हाउस एनकाउंटर में फरार दस-दस लाख के इनामी छह आतंकियों के फाइलों पर जमी धूल एटीएस साफ करने लगी है। दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद, गोरखपुर जैसे महानगरों में दहशतगर्दी फैलाने के आरोप में फरार इन आतंकियों के परिजनों और रिश्तेदारों के बारे में जानकारियां जुटाई जा रही हैं।
लखनऊ में दो आतंकियों की गिरफ्तारी के बाद से सुरक्षा एजेंसियां आजमगढ़ के तार भी जोड़ रही है। सुरक्षा एजेंसियों की ओर से माना जा रहा है कि सीमी, इंडियन मुजाहिदीन संगठन कमजोर पड़ने के बाद तेजी से उभर रहे अलकायदा समर्थित अंसार गजवातुल हिंद से भी जुड़ रहे हैं। 19 सितंबर 2008 को बाटला हाउस एनकाउंटर में आजमगढ़ के सरायमीर थाने के संजरपुर गांव निवासी डॉ. शाहरनवाज, शादाब उर्फ बड़ा साजिद उर्फ जुनैद चिकना, अबू राशिद, राशिद उर्फ सुल्तान, आसिफ और आफताब का नाम दिल्ली, मुंबई और अहमदाबाद में हुए बम धमाके दौरान आया था। बाटला हाउस एनकाउंटर के बाद से ही डॉ. शाहनवाज, शादाब उर्फ बड़ा साजिद उर्फ जुनैद चिकना और अबू राशिद की तलाश एनआईए सहित एटीएस कर रही है। इन आतंकियों की 2018 में हिस्ट्रीशीट भी आजमगढ़ में खोली गई थी।
बाटला एनकाउंटर के बाद से नहीं आए आजमगढ़
आजमगढ़ के एक पुलिस अधिकारी के अनुसार संजरपुर के फरार दस-दस लाख रुपये के इनामी आतंकियों की फोटो में और वर्तमान में बहुत अंतर आ गया होगा। इसके कारण पुलिस उन्हें पहचान भी नहीं पा रही है। 12-13 साल में तो और भी हुलिया बदल गया होगा। इसका फायदा भी आरोपी उठाते होंगे।