बेल्जियम के सेपे वरमीरेन ने तानपुरा बजाया। महाराज बनारस विद्या न्यास द्वारा आयोजित इस ध्रुपद मेले का उद्घाटन संयोजक महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र और पद्मश्री से सम्मानित प्रो. ऋत्विक सान्याल ने किया।
देसी-विदेशी शास्त्रीय संगीत रसिकों संग पांच दिवसीय 52वें साल बुधवार की रात अंतरराष्ट्रीय ध्रुपद मेले का शुभारंभ हो गया। पहली प्रस्तुति लेकर तुलसीघाट के मंच पर आए देवब्रत मिश्र ने सुरबहार वादन किया। राग वाचस्पति में अलाप जोड़ झाला के बाद ध्रुपद रचना चौताल और अंत शूल ताल से किया। पखावज पर अयोध्या से आए वैभव रामदास ने संगत किया।
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बेल्जियम के सेपे वरमीरेन ने तानपुरा बजाया। महाराज बनारस विद्या न्यास द्वारा आयोजित इस ध्रुपद मेले का उद्घाटन संयोजक महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र और पद्मश्री से सम्मानित प्रो. ऋत्विक सान्याल ने किया। संस्थापक सदस्य प्रो. राजेश्वर आचार्य ने अपनी ध्वनि से ध्रुपद मेला के पूर्व संरक्षक डॉ. विभूति नारायण सिंह के योगदान को याद किया।
मेला की स्थापना में महंत पं. अमरनाथ मिश्र और प्रो. लालमणि मिश्र की आधार भूमिका को नमन किया। इसकी अर्ध शताब्दी काल की सफल यात्रा का सारथी तत्कालीन महंत प्रो. वीरभद्र मिश्र को बताया। उनके इस संकल्प को प्रेरक बताया। पंडित स्वर्ण प्रताप चतुर्वेदी के आचार्यत्व में पं रामफल त्रिवेदी, पं. रामदत्त द्विवेदी, पं. हेमंत त्रिपाठी, पंकीर्ति नाथ पांडेय ने वैदिक मंगलाचरण की प्रस्तुति दी।