डीएवी पीजी कॉलेज के अर्थशास्त्र विभाग के अध्यक्ष प्रो. अनूप कुमार मिश्र ने कहा कि उत्तर प्रदेश का वर्ष 2026-27 का बजट केवल आय-व्यय का दस्तावेज नहीं, बल्कि राज्य की दीर्घकालिक विकास-दृष्टि का नीति-पत्र है। लगभग 9.12 लाख करोड़ के आकार वाला यह बजट प्रदेश के इतिहास का सबसे बड़ा बजट है।
यह संकेत देता है कि राज्य सरकार वृहद सार्वजनिक निवेश को विकास और रोजगार सृजन का मुख्य इंजन बनाना चाहती है। उन्होंने कहा कि बजट की केंद्रीय धुरी है ऊंचा पूंजीगत व्यय, क्षेत्रीय संतुलन, और स्थानीय उद्योगों का सशक्तीकरण। आर्थिक सिद्धांतों की भाषा में कहें तो यह बजट ‘मल्टीप्लायर इफेक्ट’ पर आधारित रणनीति को अपनाता दिखता है, जहां सरकारी निवेश निर्माण गतिविधियों को बढ़ाता है, निजी निवेश को प्रेरित करता है, रोजगार उत्पन्न करता है और अंततः आय व मांग में वृद्धि करता है।
प्रदेश के बजट में पूंजीगत व्यय में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है। एक्सप्रेस-वे, मेट्रो, एयरपोर्ट, औद्योगिक पार्क, डिफेंस कॉरिडोर और लॉजिस्टिक हब जैसे बुनियादी ढांचे पर विशेष बल दिया गया है। पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे, डिफेंस कॉरिडोर और लॉजिस्टिक पार्क जैसी परियोजनाएं प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों प्रकार के रोजगार उत्पन्न करती हैं।
निर्माण क्षेत्र में मजदूरी के अवसर बढ़ते हैं, जबकि परिवहन, होटल, व्यापार और सेवा क्षेत्रों में भी नई संभावनाएं खुलती हैं। एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना को आगे बढ़ाते हुए स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और वैश्विक बाजार से जोड़ने का प्रयास किया गया है।
इसे भी पढ़ें; Exclusive: 235 साल बाद प्रदेश के पहले राजकीय इंटर कॉलेज में जुलाई से अंग्रेजी माध्यम में होगी पढ़ाई, जानें- खास
बनारसी साड़ी, भदोही कालीन, मुरादाबाद पीतल, सहारनपुर लकड़ी शिल्प, यह केवल सांस्कृतिक धरोहर नहीं, बल्कि लाखों परिवारों की आजीविका हैं। यदि वित्तीय सहायता, विपणन सुविधा और निर्यात प्रोत्साहन मजबूत रहे, तो ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में रोजगार के अवसर तेजी से बढ़ सकते हैं। उन्होंने कहा कि पूर्वांचल लंबे समय तक विकास असंतुलन का प्रतीक रहा। लेकिन, अब इसे एक नई आर्थिक धुरी के रूप में विकसित करने का प्रयास हो रहा है, जिसका केंद्र वाराणसी है।