माई सिटी रिपोर्टर वाराणसी। जुर्म, जरायम के दलदल में फंसकर जिला जेल चौकाघाट की चहारदीवारी में कैद बंदियों को शासन स्तर से सुधारने का मौका मिल रहा है। वह फिर से मुख्य धारा में जुड़कर अपना और परिवार के भविष्य को संवार सकते हैं। बंदियों को शिक्षा के साथ ही कौशल प्रशिक्षण और रोजगार मुहैया कराने की तैयारी है। जिला जेल और होप वेलफेयर ट्रस्ट के बीच सोमवार को एमओयू हुआ है। समझौते के तहत कैदियों और बंदियों को शिक्षा, कौशल प्रशिक्षण और रोजगार से जोड़ने के लिए कार्य होगा। जिला जेल अधीक्षक सौरभ श्रीवास्तव ने बताया कि मुख्य उद्देश्य जेल से रिहा होने के बाद बंदी दोबारा अपराध की ओर न जाएं और समाज में सम्मानजनक जीवन जी सकें। होप वेलफेयर ट्रस्ट के संस्थापक रवि मिश्रा की टीम जेल में बंदियों के लिए साप्ताहिक कक्षाएं लेती है, उन्हें मानसिक, सामाजिक और नैतिक रूप से मजबूत बनाया जाता है। इन कक्षाओं में मनोवैज्ञानिक शिक्षा के साथ-साथ इतिहास, कानून, विज्ञान और तकनीक जैसे विषयों की जानकारी दी जाती है। बंदियों में उत्साह है, साथ ही संस्था ने उन्हें वर्तमान और भविष्य में हर प्रकार के अपराध से दूर रहने का सामूहिक शपथ भी दिलवाया।
महिला बंदी बना रही है खिलौने और झोले होप संस्था के सह संस्थापक संदीप गुप्ता ने बताया कि पुरुष और महिला बंदियों को स्वरोजगार के लिए खिलौने और झोले बनाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। संस्था का उद्देश्य बंदियों की ओर से तैयार उत्पादों को बाजार से जोड़कर उचित मूल्य दिलाना है, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें।