प्रयाग में 14 जनवरी को मकर स्नान से आरंभ हो रहे माघ मेले को लेकर काशी में संतों-भक्तों का डेरा जमने लगा है।
गंगा घाटों पर कुटिया बनाकर संतों ने जहां धूनी रमानी शुरू कर दी है, वहीं खझड़ी, तंमूरे के साथ कबीर के भजनों पर झूमने-नाचने का दौर शुरू हो गया है। उधर, सीरगोवर्धन में माघी पूर्णिमा पर संत रविदास के जन्मस्थान पर लगने वाले मेले के लिए संत समागम शुरू हो गया है।
मध्यप्रदेश, राजस्थान, झारखंड, बिहार के अलावा अन्य प्रदेशों से कबीरपंथियों, रैदासियों के झुंड निकल पड़े हैं।
दरभंगा घाट पर सोमवार को कबीरपंथियों ने डेरा डाल दिया। मन तुम सतगुरु खोजो सांचा/ऊंची दुकान देख मत भूलो ताको माल है कांचा... के बोल पर संत मगन नजर आए।
संतों के थिरकते समूह के साथ तमाम सैलानी भी मुग्ध नजर आए।
मध्य प्रदेश के सागर जिले से आए संत रविदास के अनुयायी सुखराम दास और हाकम दास भी खझड़ी बजा कर नाचते रहे।
हाकम दास ने बताया कि तीन दिन काशी में प्रवास के बाद वह माघ मेले में प्रयाग रवाना होंगे। इसी तरह दशाश्वमेध घाट पर भस्मी पोते संतों ने धूनी रमा ली है। ललिता घाट, मीर घाट पर भी संतों की टोलियों ने डेरा डाल दिया है।
इलाहाबाद में माघ मेले के मद्देनजर रेल प्रशासन ने कुछ विशेष गाड़ियां चलाने का निर्णय लिया है। मेल-एक्सप्रेस गाड़ियों का अतिरिक्त ठहराव भी कराया जाएगा। साथ ही कई गाड़ियों में अतिरिक्त कोच लगाए जाएंगे।
मंडुवाडीह-इलाहाबाद सिटी-मंडुवाडीह का प्रत्येक स्टेशन पर ठहराव होगा तथा सात विशेष सवारी गाड़ियां चलाई जाएंगी। इसके अलावा इलाहाबाद सिटी से एक अतिरिक्त ट्रिप हेतु विशेष गाड़ी 27 जनवरी को भटनी तक चलाई जाएगी।