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गंगा में विसर्जित हुईं पं. राजन मिश्र की अस्थियां, विदाई देते समय नम हुईं हर किसी की आंखें

Fri, 30 Apr 2021 09:16 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

पं. राजन मिश्र अमर रहेे के नारे से गूंजी कबीरचौरा की गलियां
अस्थि कलश को लेकर उनके बेटे और परिवार के लोग गंगा घाट पहुंचे
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अस्थि कलश को लेकर जाते उनके बेटे और परिवार के लोग । - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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वाराणसी के प्रख्यात शास्त्रीय गायक पद्मभूषण स्व. पंडित राजन मिश्र की अस्थियां गंगा में विसर्जित हो गईं। कबीरचौरा की गलियों में पं. राजन मिश्र के अस्थि कलश का फूलों की बरसात से स्वागत हुआ और पं. राजन मिश्र अमर रहे का जयकारा भी गूंजता रहा। इस दौरान हर किसी की आंखें नम हो उठीं।

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शुक्रवार को फूल-मालाओं से सजे पद्मभूषण पं. राजन मिश्र के अस्थि कलश को लेकर उनके बेटे और परिवार के लोग गंगा घाट पहुंचे। इस दौरान लोग पं. मिश्र का मशहूर गीत धन्य भाग्य सेवा का अवसर पाया... गुनगुनाते रहे। अस्सी घाट के ठीक सामने बजड़े से बीच धारा में पहुंचकर अस्थियां गंगा को समर्पित की गईं।

अस्सी घाट पर जहां कभी दोनों भाई पं. राजन-साजन मिश्र की जादुई आवाज गूंजती थी वहीं बृहस्पतिवार को पं. राजन मिश्र अमर रहे के जयकारे गूंज रहे थे। इसके पूर्व शुक्रवार की सुबह अस्थि कलश पं. साजन मिश्र व रजनीश मिश्र दिल्ली से लेकर बाबतपुर पहुंचे। कबीरचौरा स्थित आवास पर आम लोगों के दर्शनार्थ रखा गया। नम आंखों से कलाकारों समेत संगीत जगत से जुड़े लोगों ने पुष्पांजलि अर्पित की। पं. रजनीश मिश्र ने पूरे विधान से वीडियो काल पर अपनी मां व परिवारीजन को भी दिखाया। इससे पहले कबीरचौरा स्थित उनके आवास पर लोगों ने उनके अस्थि कलश पर पुष्प अर्पित किया।
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अस्थि कलश गंगा में विसर्जित करते। - फोटो : अमर उजाला
घर के अंदर नहीं गए पं. साजन मिश्र
पं. राजन मिश्र का अस्थि कलश कबीरचौरा स्थित पैतृक आवास के बाहर चबूतरे पर दर्शन के लिए रखा गया था। पंडित साजन मिश्र ने बताया कि मृत्यु के बाद के कर्मकांड दिल्ली में किए जा रहे हैं। घंट भी दिल्ली में ही बांधा गया है। इसलिए अस्थि कलश लेकर वह अपने घर में नहीं गए। बाहर ही रहे। अस्थियों का विसर्जन करने के बाद वह पुन: कबीरचौरा लौटे। घर के बाहर दो से तीन घंटे चबूतरे पर बैठे रहे। शोक जताने के लिए आने वाले लोगों से वहीं मुलाकात की। शाम को विमान से दिल्ली लौट गए।
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