वाराणसी। बीएचयू के दृश्य कला संकाय में आयोजित क्षेत्रीय कला प्रदर्शनी में प्रो. जयशंकर मिश्र, वेद प्रकाश मिश्रा और डॉ. सुनील विश्वकर्मा जैसे सीनियर आर्टिस्ट की कृतियों के बीच जगह बनाकर नवोदित कलाकार खासे उत्साहित हैं। प्रदर्शनी में पूर्वांचल के 60 युवा कलाकारों की कृतियां लगाई गई हैं। इसमें से कई ऐसे हैं, जिन्हें पहली बार ऐसा मौका मिला है। उनका कहना है कि इस प्रदर्शनी से उन्हें नई पहचान और नया जज्बा मिला है।
पांच दिवसीय प्रदर्शनी में सारनाथ, संदहा की रहने वाली हिता सिंह की पेंटिंग खूब चर्चा में है। विद्यापीठ से बीएफए कर रही हिता ने बनारस की गलियों की खासियत को रंगों के बेहतरीन संयोजन से कैनवास पर आकर्षक तरीके से दर्शाया है। उनका कहना है कि ऐसी प्रदर्शनी में जगह मिलना बड़ी बात है। इससे नए कलाकारों को आगे बढ़ने का बल मिलता है। दृश्य कला संकाय, बीएचयू से रिसर्च कर रहे सोनी ने ब्रांज के मूर्ति शिल्प के जरिए जीवन चक्र को बेहतरीन ढंग से दर्शाया है। सोनी की कृतियां ऐसी कई प्रदर्शनियों की गवाह बन चुकी हैं। इतना ही नहीं उनकी कृति जर्मनी में भी धूम मचाने में सफल रही है।
एप्लाइड आर्ट्स में शोध कर रहे आशीष कुमार गुप्ता ने सिटी ऑफ लाइट यानी बनारस की छटा को ब्लैक एंड व्हाइट फोटोग्राफी के जरिए अलग अंदाज में दर्शाया है। उनकी यह कृति आल इंडिया फाइन आर्ट्स एंड क्राफ्ट सोसाइटी द्वारा बेस्ट आर्ट के तौर पर भी चुनी गई है। उनका कहना है कि आज बनारस की कला को पूरे विश्व की पहचान मिल रही है। गाजीपुर के मुकेश कुमार गुप्ता ने अपनी कृति ‘त्रिभुवन’ में तीनों लोकों में शिव की महिमा का चित्रण किया है। उनका कहना है एप्लाइड आर्ट्स ने युवाओं की क्रिएटिविटी को नया आयाम दिया है। बाराबंकी के विलोक कुमार ने मूर्ति शिल्प के माध्यम से परस्पर बातचीत के अंदाज को मोहक तरीके से दर्शाया है।