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संतों की चेतावनी को दरकिनार कर मनमानी कर रहा शासन-प्रशासन

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वाराणसी। साधु, संतों व विद्वानों की चेतावनी को दरकिनार कर शासन-प्रशासन लगातार मनमानी कर रहा है। शास्त्रों की महत्ता को कुंठित कर नासमझी, अज्ञानता और नास्तिकता का परिचय देते हुए सरकारी अमला क्रूरता की सारे हदें पार कर रहा है। जिसकी बानगी श्री काशी पुराधिपति बाबा विश्वनाथ की कचहरी के समीप स्थित अति पुरातन अमोघ फलदायी अक्षय वट वृक्ष को धराशायी और हनुमान मंदिर को जीर्णशीर्ण अवस्था के रूप में देखने को मिल रही है।
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उक्त बातें अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा के महामंत्री, काशी तीर्थ पुरोहित सभा के कार्यवाहक अध्यक्ष व गंगा सेवा समित के अध्यक्ष पं कन्हैया त्रिपाठी (शास्त्री) ने कहीं। उन्होंने धार्मिक एवं शास्त्रीय धरोहरों की हो रही अनवरत विनिष्टता की घोर निंदा कर इस पर रोक लगाने की अपील की। साथ ही कहा कि धार्मिक दृष्टिकोण से इतर मौजूदा कोरोना काल में जहां पूरा देश ऑक्सीजन की कमी झेल रहा है, ऐसी विकट परिस्थितियों में भी ऑक्सीजन सप्लाई करने वाले वृक्षों को उखाड़ना कहाँ तक उचित है। वट, पीपल, नीम आदि ऑक्सीजन प्रदान करने वाले वृक्षों को बेदर्दी से धराशायी किया जा रहा है। उनकी जगह खोखले विकास और कंक्रीट के जंगलों की श्रृंखलाएं तैयार की जा रही हैं। जो धार्मिक दृष्टिकोण से भी बेहद अशुभ और अनिष्टकारी माना जाएगा। कार्यवाहक अध्यक्ष ने कहा कि एक तरफ पर्यावरण को बचाने के लिए ज्यादा से ज्यादा ऑक्सीजन प्रदत वृक्षारोपण करने की बात हो रही है। वहीं, दूसरी ओर वृक्षों को विनिष्ट किया जा रहा है।
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