काशी करवट का भ्रम पैदा करने वाले रत्नेश्वर महादेव मंदिर के शिखर के जीर्णोद्धार के लिए बीएचयू के न्यूरोलॉजिस्ट प्रो. वीएन मिश्रा आगे आए हैं। चार साल पहले बिजली गिरने से मंदिर का शिखर क्षतिग्रस्त हो गया था।
उन्होंने बताया कि काशी के घाटों को विशिष्ट पहचान दिलाने वाले इस टेढे़ मंदिर की हालत पिछले चार सालों में बहुत ज्यादा खराब हुई है। चार साल पहले बिजली गिरने के कारण क्षतिग्रस्त हुए शिखर की मरम्मत अब तक नहीं हो सकी है। इसलिए मैंने यह निर्णय लिया है कि मंदिर की मरम्मत के लिए जितने रुपये खर्च होंगे मैं अपने वेतन से दूंगा। मंदिर की मरम्मत के लिए पहला चेक दस हजार रुपये का मंगलवार को प्रशासन को सौंपूंगा। 12 अगस्त 2016 में मणिकर्णिका और सिंधिया घाट के बीच स्थित रत्नेश्वर महादेव मंदिर पर बिजली गिरने से पूर्वी और उत्तरी छोर का शिखर गिर गया था।
निर्माण के साथ ही झुक गया था मंदिर
पुरातत्वविदें का कहना है कि निर्माण स्थल के चयन में गड़बड़ी के कारण बनने के कुछ सालों बाद मंदिर एक तरफ झुक गया। मंदिर से कई किवदंतियां भी जुड़ी हुई हैं। 18वीं शताब्दी के प्रारंभ में मंदिर को ग्वालियर की रानी बैजा बाई ने बनवाया था। कुछ जगह उल्लेख मिलता है कि रानी अहिल्या बाई होल्कर की दासी रत्ना बाई ने मंदिर बनवाया था। मंदिर की ऊंचाई 25 से 30 फीट है और इसे गंगा के सबसे निचली तलहटी में बनवाया गया है। इसको लेकर काशी करवट का भी भ्रम फैलाया जाता है।