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मीनार और मंदिर की स्थापत्य कला में है बहुत अंतर

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वाराणसी। इटली में स्थित लीनिंग टावर ऑफ पीसा वास्तुशिल्प का एक अद्भुत नमूना है। करीब 54 मीटर ऊंची पीसा की मीनार अपनी नींव से 4 डिग्री झुकी है। इसी वजह से यह दुनियाभर में मशहूर है। वहीं, काशी में गंगा किनारे मणिकर्णिका घाट पर रत्नेश्वर महादेव का मंदिर है जो अपनी नींव से नौ डिग्री झुका हुआ है। इसे लेकर सोशल मीडिया पर तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं।
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पुरातत्वविदें का कहना है कि मंदिर निर्माण स्थल के चयन में गड़बड़ी के कारण मंदिर बनने के कुछ सालों बाद एक तरफ झुक गया। मंदिर से कई किवदंतियां जुड़ी हुई हैं। 18वीं शताब्दी के प्रारंभ में मंदिर को ग्वालियर की रानी बैजा बाई ने बनवाया था। कुछ जगह उल्लेख मिलता है कि रानी अहिल्या बाई होल्कर की दासी रत्ना बाई ने मंदिर बनवाया था। मंदिर की ऊंचाई 25 से 30 फीट है और इसे गंगा की सबसे निचली तलहटी में बनवाया गया है। इसे लेकर काशी की करवट का भी भ्रम फैलाया जाता है। क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी डॉ. सुभाष यादव का कहना है कि मीनार और मंदिर की तुलना का कोई औचित्य नहीं है। दोनों की स्थापत्य कला में बहुत अंतर है। दोनों की झुकने की तुलना का भी कोई औचित्य नहीं है। सिर्फ झुकने के आधार पर किसी मंदिर को विश्व धरोहर घोषित नहीं किया जा सकता। विश्व धरोहर घोषित करने के लिए कई मानक होते हैं। यह बड़ी लंबी प्रक्रिया है। अभी तक यह मंदिर उन मानकों पर परखा नहीं गया है।
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