फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सतर्कता: टेलीमानस पर 10 महीने में 51000 कॉल... मानसिक तनाव की 60%; युवाओं में ज्यादा चिंता

Wed, 26 Nov 2025 03:49 PM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News: वाराणसी समेत पूर्वांचल में अवसाद के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में टेलीमानस हेल्पलाइन पर कॉल कर लोग परामर्श ले रहे हैं।
विज्ञापन
वाराणसी सेंटर में काम करते कर्मी - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

मानसिक तनाव के शिकार अब हर उम्र के लोग हो रहे हैं। 18 से 30 साल के लोग ज्यादा जूझ रहे हैं। इनमें पढ़ाई करने वाले छात्र, नौकरी करने वाले और कॅरिअर को लेकर चिंतित युवा ज्यादा हैं। इसकी जानकारी टेलीमानस हेल्पलाइन पर आए कॉल से मिली है। वाराणसी समेत पूर्वांचल में अवसाद के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। 

विज्ञापन


वाराणसी सेंटर से 25 जिलों के लोगों को अवसाद में आने के बाद परामर्श दिया जा रहा है। हर महीने औसतन 5,100 फोन कॉल आ रहे हैं, जिनकी काउंसिलिंग कर उन्हें अवसाद से बचाया जा रहा है। जनवरी से अब तक 1.46 लाख से अधिक लोग टेलीमानस से मदद मांग चुके हैं। अक्तूबर तक 51,143 कॉल आई हैं। अधिकतर लोग उदासी, निराशा, थकान और हिंसक स्वभाव के कारण फोन कर रहे हैं। 

चिंता, पैनिक अटैक और फोबिया के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं। इनकी संख्या 22,000 से अधिक है। 21-30 वर्ष के युवा कॅरिअर, नौकरी के टारगेट, आर्थिक दबाव और रिश्तों में तनाव के शिकार हैं। इन्होंने अवसाद, उदासी और निराशा की शिकायत की है। 
विज्ञापन


इनके कॉल लगभग 50% हैं। इस उम्र के किशोर अधिकतर पढ़ाई और दोस्ती को लेकर चिंतित हैं। इन्हें बोर्ड परीक्षा, पढ़ाई का दबाव, सोशल मीडिया से जुड़े रिश्तों के टूटने का डर और स्कूल की प्रतिस्पर्धा को लेकर तनाव है। इनकी कॉल 13% हैं।

विज्ञापन

24 घंटे होती है काउंसिलिंग 

टेलीमानस के पीएसडब्ल्यू पंकज यादव बताते हैं कि हेल्पलाइन पर 24 घंटे काउंसिलिंग की जा रही है। कोविड के बाद इस प्रकार के मरीज़ों के इलाज के लिए फरवरी 2023 में जिले में इसे स्थापित किया गया था। यूपी में वाराणसी, गोरखपुर, बरेली और आगरा में टेलीमानस के चार सेंटर बनाए गए हैं। इसकी मॉनिटरिंग लखनऊ केजीएमयू से होती है। वाराणसी सेंटर में कुल 11 काउंसलर शिफ्टवार काम कर रहे हैं। लखनऊ से हर अंतराल पर यहां की रिपोर्ट मंगाई जाती है।

टेलीमानस के आंकड़े
ज्यों ज्यों दवा दी गई, बढ़ता गया मर्ज...
वर्ष - मरीजों की संख्या
2023 - 4999 (फरवरी से दिसंबर तक)
2024 - 45423
2025 - 51143 (जनवरी से अक्तूबर तक)

21-30 वर्ष आयु के युवा अवसादग्रस्त
21-30 वर्ष के युवा करियर, नौकरी के टारगेट, आर्थिक दबाव, रिश्तों में तनाव के शिकार हैं। इन्होंने अवसाद, उदासी और निराशा की भी शिकायत की है। इनके कॉल करीब 50% आए।

12-17 वर्ष के किशोर दोस्ती और पढ़ाई के प्रति चिंतित
इस उम्र के किशोर अधिकतर पढ़ाई और दोस्ती को लेकर चिंतित हैं। इन्हें बोर्ड परीक्षा, पढ़ाई का दबाव, सोशल मीडिया से जुड़े रिश्तों के टूटने का डर और स्कूल की प्रतिस्पर्धा को लेकर तनाव है। इनके कॉल करीब 13 प्रतिशत आए।

45-65 वर्ष के लोगों को दोहरी जिम्मेदारियों की चिंता
अधेड़ और बुजुर्ग घर-परिवार की जिम्मेदारियां, स्वास्थ्य, आर्थिक चिंता आदि सता रही है। इन्हें लगातार चिंता और नींद न आने जैसी समस्या बनी हुई है। कभी-कभी इनका परिवार हिंसक भी हो जा रहा है। इस प्रकार की करीब 15 प्रतिशत समस्याएं रिपोर्ट हुई हैं।
 
सबसे अधिक उदासी और निराशा के कॉल
समस्या - कॉल की संख्या - प्रतिशत
अवसाद/उदासी/निराशा - 35000 - 34.46%
नींद न आना / डरावने ख्याल - 24315 - 23.94%
परीक्षा/ काम की चिंता / रिश्तों का तनाव - 27432 - 27%
फोबिया - 12159 - 11.97%

क्या कहते हैं अधिकारी
टेलीमानस 14416 पर कॉल करके कोई भी व्यक्ति 24x7 मदद ले सकता है। अवसाद और निराशा से पीड़ित लोगों के लिए टेलीमानस के काउंसलर दिन रात मेहनत कर रहे हैं। आवश्यकता पड़ने पर मनोचिकित्सक और आपात स्थितियों में पुलिस की भी सहायता ली जा सकती है। -डॉ. चंद्रप्रकाश मल्ल, निदेशक, मानसिक अस्पताल

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें