अपने माता-पिता से नाराज होकर दो साल पहले नेपाल से भागे किशोर को सोशल मीडिया की मदद से उनके परिवार से मिलाने की प्रक्रिया शुरू हो गई। नेपाल के एक छोटे से कस्बे देवदहा का रहने वाले किशोर के माता और पिता के बीच तलाक हो गया था और दोनों ने दूसरी शादी कर ली थी। किशोर मां के साथ रहता था, लेकिन सौतेले पिता की प्रताड़ना से आजिज आकर वह दो वर्ष पूर्व घर से निकल गया और सोनौली होते हुए फरीदाबाद चला गया।
यहां उसने एक होटल में काम किया। 14 वर्ष से लेकर 16 वर्ष की उम्र तक उसने वहीं पर काम किया। फिर उसे अपने मां की याद आई और मार्च महीने में एक दिन वह नेपाल के लिए निकल पड़ा। रास्ते में भूख लगने पर वह बनारस में ही उतर गया। यहां चाइल्ड लाइन सहायता केंद्र के लोगों की उस किशोर पर नजर पड़ी तो उस किशोर को धूपछांव खुला आश्रम संस्था में 14 दिन के लिए क्वारंटीन कर दिया।
बाद में सात अप्रैल को किशोर को रामनगर स्थित राजकीय बाल सुधार गृह में लाया गया। किशोर के नेपाल स्थित बताए गए पते पर जब संपर्क किया गया तो पता चला कि परिजनों ने पता बदल दिया है। जिससे उनका पता नहीं मिल पा रहा था। इसके बाद संस्था के अधीक्षक अशोक कुमार ने फेसबुक की मदद ली यह ट्रिक काम कर गई।
अधीक्षक अशोक कुमार की फेसबुक मेसेंजर के जरिये एक दिन उसकी मां सपना से बात हुई। इसके बाद किशोर की उसकी मां से बात कराई गई। फोन पर बेटा और मां दोनों भावुक हो गए और रोने लगे। जिसके बाद से ही किशोर को उसके घर नेपाल भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। शनिवार को नेपाली दूतावास के आदेश के बाद प्रवासी नेपाली मित्र मंच संस्था के पदाधिकारी किशोर को उसकी मां से मिलाने के लिए नेपाल रवाना हुए।