बरेका के केंद्रीय खेल मैदान में होने वाली रामलीला और दशहरा सिर्फ रावण दहन तक सीमित नहीं है। यहां रामचरित मानस की चौपाइयों के बीच रामकथा मंच पर उतरती है और पात्र बिना एक शब्द बोले अपने अभिनय से कथा को जीवंत करते हैं। राम के वनगमन से रावण वध तक की इस अनूठी प्रस्तुति में इस बार राम, लक्ष्मण, शत्रुघ्न, केवट, अंगद और जटायु की भूमिका नए कलाकार निभाएंगे। सबसे खास बात इसका मूक अभिनय है। मंच पर पात्र अपने संवाद स्वयं नहीं बोलते। वाचक और अन्य कलाकारों की आवाज में चौपाइयां और संवाद गूंजते हैं और पात्र अपनी भाव-भंगिमा व अभिनय से उन्हें जीवंत करते हैं।
इस बार रूपक में कई प्रमुख भूमिकाओं के लिए नए चेहरों को मौका मिला है। राम, लक्ष्मण, शत्रुघ्न, केवट, अंगद और जटायु की भूमिका निभाने वाले नए कलाकार इन दिनों लगातार अभ्यास कर रहे हैं। उन्हें सिर्फ संवाद और पात्र की जानकारी ही नहीं दी जा रही, बल्कि मंच पर भाव कैसे दिखाने हैं, किस समय किस तरह की मुद्रा रखनी है और कथा के अनुरूप अभिनय कैसे करना है, इसकी भी बारीकी से तैयारी कराई जा रही है।
रूपक के निदेशक एसडी सिंह के निर्देशन में प्रशिक्षण चल रहा है। प्रस्तुति में गीत, गजल, कजरी, कहरवा समेत विभिन्न लोकगीतों का भी समावेश रहेगा। संगीत और वाचन के साथ कलाकारों के अभिनय का तालमेल बैठाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।