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हरितालिका तीज: ब्रह्म मुहूर्त से प्रदोष काल तक महिलाएं करेंगी शिव व पार्वती की पूजा, जानें पूजा के शुभ मुहूर्त

Sun, 13 Sep 2026 02:39 PM IST
Pragati Chand अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

वाराणसी में भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरतालिका तीज मनाई जाएगी। हरितालिका तीज का निराजल व्रत रखकर सोमवार को सुहागिने महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करेंगी। 
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Hartalika Teej 2026 - फोटो : अमर उजाला AI
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विस्तार
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सुहागिनें अखंड सौभाग्य और कुंवारियां मनचाहे वर की कामना के लिए 14 सितंबर को हरितालिका तीज का निराजल व्रत रखकर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करेंगी। माता पार्वती को सुहाग पिटारी में 16 सामग्री और भगवान शिव को वस्त्र, जनेऊ, भांग-धतूरा व 16 प्रकार की पत्तियां चढ़ाएंगी। पूजा ब्रह्म मुहूर्त से ही शुरू हो जाएगी, जो प्रदोष काल के दौरान भी की जाएगी। ब्रह्म मुहूर्त 04:32 बजे तथा प्रदोष काल में शाम 06:27 बजे से पूजा होगी। शिव मंदिरों में दर्शन-पूजन के लिए भीड़ होगी। वहीं, महिलाओं ने पूजन सामग्री की खरीदारी की।

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भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरतालिका तीज मनाई जाएगी। श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के पूर्व अध्यक्ष प्रख्यात ज्योतिषविद् प्रो. नागेंद्र पांडेय ने बताया कि तृतीया तिथि रविवार को सुबह 7:15 बजे शुरू होगी, जो अगले दिन सोमवार को सुबह 7:14 बजे तक रहेगी। हिंदू धर्म में उदयातिथि की प्रधानता होने के कारण सोमवार को दिनभर तृतीया तिथि रहेगी। पूरे दिन हरतालिका तीज मनाया जाएगा। 

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सुहागिनें दिनभर निर्जला व्रत का संकल्प लेकर अष्ट प्रहर की पूजा करेंगी। इस महाव्रत में विविध सामग्री तथा शास्त्रीय विधि से पूजा करेंगी। शिव मंदिरों में दर्शन-पूजन के लिए भीड़ होगी। आचार्य दैवज्ञ कृष्ण शास्त्री ने बताया कि सुहागिनें तांबे या पीतल के कलश, सूखा नारियल, पान के पत्ते, सुपारी, लौंग, इलायची से कलश स्थापना करेंगी। 

शुद्ध जल, गंगाजल, पंचामृत, अबीर, चंदन, कुमकुम, अक्षत, इत्र, जनेऊ, कलावा, मौली से अभिषेक कर पूजन करेंगी। मिट्टी या धातु के दीपक, देशी घी, तिल या सरसों का तेल, रुई की बत्तियां, कपूर, धूपबत्ती से आरती करेंगी।

16 सुहाग की सामग्री व 16 पत्तियों से गौरी-शंकर की पूजा
16 प्रकार की सुहाग सामग्री एवं 16 प्रकार की पत्तियों से गौरी-शंकर की पूजा होगी। पत्तियां उल्टी और फूल-फल सीधे चढ़ाए जाते हैं। इसके साथ ऋतु फल, भीगे चने, सत्तू, भांग, धतूरा, मिठाइयों का भोग लगेगा। शुभ मुहूर्त में बालू या मिट्टी से शिव-पार्वती और श्रीगणेश जी की प्रतिमाएं बनाकर चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर स्थापित करनी चाहिए। गणेश पूजन के बाद भगवान शिव और माता पार्वती का आह्वान करें। हरतालिका तीज की कथा का श्रवण करें। यह व्रत अष्ट प्रहर तक चलता है। पूरी रात जागरण करेंगी।

देवदार, चंपा, कनेर और अशोक पत्र से पूजन से गौरी-शंकर की कृपा
सुहागिनें व कुंवारियां माता पार्वती और शिव जी की पूजा अलग-अलग सामग्रियों से करती हैं तो उन्हें फल भी उसी निमित्त भाव से मिलेगा। बिल्वपत्र से सौभाग्य की प्राप्ति, जाती पत्र (चमेली) से संतान सुख, सेवंतिका से दांपत्य जीवन में मधुरता, बांस के पत्ते से वंश वृद्धि, देवदार पत्र से ऐश्वर्य और कीर्ति, चंपा पत्र से सौंदर्य व उत्तम स्वास्थ्य, कनेर पत्र से यश व मानसिक सुख, अगस्त्य पत्र से वैभव एवं समृद्धि, भृंगराज से साहस व पराक्रम, धतूरा पत्र से मोक्ष एवं बंधनों से मुक्ति, आम के पत्ते से मांगलिक कार्यों में सिद्धि, नीम के पत्ते से निर्मल चरित्र एवं शुद्धि, अशोक के पत्ते से कष्ट निवारण व शांत जीवन, पान के पत्ते से एकता, प्रेम व प्रगाढ़ता, केले के पत्ते से कार्य सफलता, शमी के पत्ते से धन-धान्य और अक्षय समृद्धि की प्राप्ति होती है।
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पूजा के शुभ मुहूर्त
हरतालिका तीज पर मुख्य रूप से सुबह और प्रदोष काल में पूजा करना सबसे उत्तम और फलदायी माना जाता है। ब्रह्म मुहूर्त 04:32 से 05:19 बजे, सुबह का शुभ मुहूर्त 06:12 से 07:06 बजे तक तथा अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:52 से दोपहर 12:41 बजे तक है। प्रदोष काल में पूजा का मुहूर्त सूर्यास्त के ठीक बाद का समय सबसे उत्तम है। 2 घंटे 24 मिनट की अवधि प्रदोष काल कहलाती है। शाम 06:27 बजे के बाद पूजा का फल विशेष है। सोमवार की शाम भगवान शिव और माता पार्वती की बालू से मूर्ति बनाकर पूजा करने का यह सबसे पवित्र समय होता है।
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