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अमर उजाला शिक्षा अभियान : कोरोना संक्रमण काल के बीच शिक्षा की अलख जगाने के लिए शिक्षकों ने की पहल

Sat, 26 Mar 2022 12:14 AM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

कोरोना की वजह से परिषदीय स्कूलों में बिना स्मार्ट फोन पढ़ाई एक बड़ी चुनौती थी। वाराणसी के बेसिक शिक्षा विभाग ने मोहल्ला पाठशाला के जरिए इस चुनौती का हल निकाला। 
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अमर उजाला अभियान शिक्षा - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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कोरोना काल ने शिक्षा जगत का पूरा स्वरूप ही बदल दिया है। डिजिटल इंडिया की मदद से शैक्षणिक गतिविधियां जारी रहीं। ऑनलाइन कक्षाओं के संचालन से बच्चों में अवसाद और लिखने में थोड़ी सी कमजोरी को अभिभावक व शिक्षकों ने महसूस किया। संक्रमण काल के बीच में ही शिक्षा को हर छात्र-छात्राओं तक पहुंचाने के लिए शिक्षकों ने कई पहल की।

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वाराणसी में कहीं मोहल्ला क्लास तो कहीं घर-घर जाकर संवाद के जरिए बच्चों को जागरूक किया गया। शिक्षकों की नवोन्मेषी प्रतिभा ने इसमें काफी मदद की। कोरोना की वजह से परिषदीय स्कूलों में बिना स्मार्ट फोन पढ़ाई एक बड़ी चुनौती थी। जिले के बेसिक शिक्षा विभाग ने मोहल्ला पाठशाला के जरिए इस चुनौती का हल निकाला।

न्यूनतम संसाधनों में कैसे बच्चों की पढ़ाई जारी रखी जाए, इसके लिए विभिन्न प्रकार के उपाय किए गए। इसी कड़ी में चिरईगांव ब्लॉक के सीवो गांव में प्राथमिक विद्यालय के शिक्षकों द्वारा नवाचार किया गया। शिक्षकों ने आसपास की बस्तियों में मोहल्ला कक्षाएं शुरू कीं।

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अमर उजाला अभियान शिक्षा - फोटो : अमर उजाला
कक्षाओं में ब्लैकबोर्ड की कमी महसूस हुई तो विद्यालय की शिक्षिकाओं ने गांव में मिट्टी से बने मकान की दीवार को ही ब्लैक बोर्ड बना दिया। बाकायदा हिंदी व अंग्रेजी की वर्णमालाएं लिखी गईं। गणित के सवाल हल कराए गए। गांव में यह नवाचार काफी चर्चा में भी रहा। 

प्राथमिक विद्यालय की शिक्षिका ज्योत्सना अग्रवाल ने बताया कि मोहल्ला कक्षाओं में हर बच्चे की कॉपी पर लिखकर समझाना मुश्किल था। बच्चों को पाठ समझ भी नहीं आता था। इसलिए कच्ची दीवार को ही ब्लैक बोर्ड की तरह इस्तेमाल करने के बारे में सोचा। इस टीम में उर्मिला यादव और अर्चना भी शामिल थीं।  

टीवी के माध्यम से दी बच्चों को शिक्षा

प्रतीकात्म तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
सेवापुरी ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय ठटरा के सहायक अध्यापक अब्दुर्रहमान ने कोरोना काल में बच्चों तक शिक्षा पहुंचाने के लिए कई जतन किए। मोहल्ला क्लास में दूरदर्शन पर प्रसारित होने वाले शैक्षिक वीडियो को दिखाने के लिए उन्होंने टीवी की व्यवस्था तो की ही साथ ही बच्चों को सेहत मंद रखने के लिए नियमित योग का अभ्यास भी कराया।

अब्दुर्रहमान बताते हैं कि पांच घंटे की मोहल्ला क्लास में नियमित कक्षाओं की ही तरह समय सारिणी के अनुसार ही कक्षाएं संचालित होती थीं। शुरुआत प्रार्थना से होती, दो कक्षाओं के बाद बच्चों का एक घंटे का लंच और खेलकूद के लिए भी समय निर्धारित था। कक्षाओं की तरह समझाना मुश्किल था, ऐसे में टीएलएम और खेलों के जरिए उन्हें विषय समझाए जाते थे। 

बच्चों का दोस्त बनने की कोशिश की

प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
सारनाथ निवासी नीलम राय के दो बच्चे थे। कोरोना काल में स्कूल बंद होने के बाद बच्चे दोस्तों से नहीं मिल पा रहे थे, जिसकी वजह से उनके व्यवहार में भी काफी बदलाव आने लगा था। शिक्षिका होने के नाते बच्चों की मन स्थिति को अच्छे से समझ पा रही थी। बच्चों को तनाव से दूर रखने के लिए खुद उनकी दोस्त बनने की कोशिश की। 
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अतिरिक्त गतिविधियों से रखा व्यस्त

खोजवा निवासी डॉ. स्वाति मिश्रा बताती हैं कि लंबे समय से बच्चों को घर में कैद रखना मुमकिन नहीं था। ऐसे में अतिरिक्त गतिविधियों से उनसे जुड़ने की कोशिश की। रूफ गार्डेनिंग के साथ उन्हें पेंटिंग सिखाना शुरू किया। बच्चे इसें काफी रुचि लेते थे और समय भी निकल जाता था।
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