अपने गांव के बच्चों को शिक्षित करने की जिम्मेदारी मिली तो उन्होंने भी इसे सहर्ष अपना लिया। अभिभावक भी उनका सहयोग कर रहे हैं। फिर तो शिक्षक और गांव के युवाओं की जुगलबंदी से न सिर्फ सरकार के ऑनलाइन शिक्षा का सपना साकार हो रहा है, बल्कि लॉकडाउन में घर बैठे बच्चे भी मन से पढ़ाई पूरा कर रहे हैं।
ऐसे हो रही पढ़ाई
परिषदीय विद्यालय के शिक्षकों ने उन युवाओं व एंड्रायड मोबाइल रखने वाले अभिभावकों का व्हाट्सएप ग्रुप बनाया है। रोजाना क्लास वर्क इसी ग्रुप में साझा किया जाता है। युवा अपने व्हाट्सएप पर आने वाली सामग्री के आधार पर अपने आसपास के 10-12 बच्चों के समूह को बैठाकर पढ़ाई करा रहे हैं। वह खुद उनकी कॉपियां भी चेक करते हैं और उसे शिक्षक को भेजते हैं।
जरुरत के अनुसार शिक्षक उसमें सुधार या कोई सुझाव बताते हैं। समय-समय पर शिक्षक बारी-बारी सभी क्षेत्रों में जाकर बच्चों के कार्यों की जांच कर रहे हैं। पढ़ाई के दौरान शिक्षक वीडियो कॉल के माध्यम से भी बच्चों से संवाद कर उनकी समस्या का समाधान करते हैं। दीक्षा एप, मिशन प्रेरणा वीडियो के माध्यम से भी पढ़ाई करा रहे हैं।
मोबाइल और इंटरनेट की दिक्कतों के कारण ऑनलाइन कक्षाओं तक ज्यादातर बच्चों की पहुंच नहीं हो पा रही थी। शिक्षकों ने गांव के युवाओं का सहयोग लेकर इस अभियान को शुरू किया, जिसके काफी सकारात्मक परिणाम मिले हैं। गांव के युवा और अभिभावक भी इससे उत्साह के साथ जुड़े हैं। स्वदेश-2 को ब्लाक के 20 विद्यालयों में प्राइवेट प्रोजेक्ट के तहत शुरू किया गया है। जल्द ही इसे पूरे ब्लाक क्षेत्र के सभी गांवों में शुरू करने के लिए रुपरेखा बनाई जा रही है। -राजीव यादव, खंड शिक्षा अधिकारी।