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शिक्षक भर्ती धांधली मामला: प्रिंटिंग प्रेस से ही सांठगांठ कर पेपर आउट किया था, एसटीएफ वाराणसी ने बंगाल से पकड़ा

Tue, 07 Sep 2021 02:52 PM IST
हरि User न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की ओर से 29 जुलाई 2018 को एलटी ग्रेड शिक्षक भर्ती परीक्षा आयोजित की गई थी। परीक्षा में धांधली के आरोपी व 25 हजार के इनामी को तीन साल बाद एसटीएफ की वाराणसी इकाई ने गिरफ्तार किया। जौनपुर के दो आरोपी पहले ही गिरफ्तार किए गए थे।
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गिरफ्तार गणेश प्रसाद। - फोटो : STF
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की ओर से 29 जुलाई 2018 को एलटी ग्रेड शिक्षक भर्ती परीक्षा आयोजित की गई थी। परीक्षा में धांधली के एक आरोपी को तीन साल बाद एसटीएफ की वाराणसी इकाई ने गिरफ्तार किया। पश्चिम बंगाल के पश्चिम वर्धमान जिले के हीरापुर थाना क्षेत्र स्थित राधा नगर क्रासिंग निवासी गणेश प्रसाद को एसटीएफ ने उसके ठिकाने से रविवार को गिरफ्तार किया। गनेश पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित था। 

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वाराणसी एसटीएफ इकाई के निरीक्षक अनिल सिंह को सूचना मिली कि शिक्षक भर्ती परीक्षा में हुई धांधली में शामिल फरार चल रहे 25 हजार का इनामी गणेश प्रसाद पश्चिम वर्धमान में लुक-छिपकर रह रहा है। इस सूचना पर एसटीएफ टीम ने उसके ठिकाने पर छापा मारकर रविवार को गिरफ्तार किया। 

प्रिंटिंग प्रेस से शुरू होता था धांधली का खेल
एसटीएफ की पूछताछ में गिरफ्तार गणेश प्रसाद ने बताया कि उनका एक गिरोह है। गिरोह के सदस्य विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं का पेपर प्रिंटिंग प्रेस से ही सांठगांठ कर ले लेते थे। इसके बाद अभ्यर्थियों से मनमानी रकम लेते थे और पहले से तैयार अभ्यर्थियों को एक स्थान पर बुलाकर प्रश्नों का उत्तर रटवा देते थे। 

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12 लाख में होता था सौदा, मास्टरमाइंड जौनपुर का था

29 जुलाई 2018 को आयोजित एलटी ग्रेड शिक्षक भर्ती परीक्षा में धांधली के  दो आरोपियों को एसटीएफ ने जून 2020 में गिरफ्तार किया था। गिरफ्तार आरोपियों में जौनपुर जनपद के नेवढ़िया थाना क्षेत्र के दुहावर निवासी अजीत चौहान व अजय चौहान थे। यही दोनों धांधली का मास्टमाइंड था। अभ्यर्थियों को तैयार कर 12 लाख रुपये वसूलता था। अजीत चौहान व अजय चौहान पर 15-15 हजार रुपये का इनाम भी घोषित था। 

मूल शैक्षणिक प्रमाण पत्र पहले जमा करा लेते थे
एसटीएफ की पूछताछ में गिरफ्तार गणेश प्रसाद ने बताया कि उनके गिरोह के सदस्य अभ्यर्थी को तैयार कर एक लाख एडवांस और 11 लाख रुपये परीक्षा के बाद देने पर सौदा तय करते थे। इसके बाद अभ्यर्थियों से उनका हाईस्कूल, इंटर, स्नातक के मूल शैक्षणिक प्रमाण पत्र ले लिया जाता था। 

इस मामले में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं का पेपर छापने वाले प्रिंटिंग प्रेस के संचालनक कोलकता के कौशिक कुमार कर के कर्मचारियों से गिरोह के सदस्य मिले थे। उन्हीं से पेपर आउट होता था। मामले में कौशिक कुमार कर आदि के विरूद्ध 28 मई 2019 को वाराणसी के थाना चोलापुर पर विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। 
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