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सेवा और समर्पण से शिक्षक ने बनाई पहचान तो मिला राष्ट्रपति सम्मान, रिटायर होने के बाद भी बच्चों से लगाव

Wed, 02 Sep 2020 12:08 PM IST
गीतार्जुन गौतम अमर उजाला नेटवर्क, जौनपुर
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रिटायर शिक्षक मो असलम। - फोटो : अमर उजाला
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जौनपुर जिले के जलालपुर विकास खंड के पूर्व माध्यमिक विद्यालय रामपुर सोइरी से 31 मार्च 2017 को रिटायर्ड हुए मोहम्मद असलम रिटायर्ड होने के बाद घर के पास में स्थित बाबू बैजनाथ प्रसाद शिक्षण प्रशिक्षण संस्थान में नियमित रूप से मुफ्त में सेवा दे रहे हैं। हालांकि कोरोना संक्रमण के चलते जब से स्कूल बंद हैं, तब से स्कूल में बच्चे नहीं आ रहे हैं।

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ऐसे में वह किसी न किसी गांव और बस्ती में जाते हैं और बच्चों को शिक्षा के लिए प्रेरित करते हैं। उनका कहना है कि जब तक वह बच्चों को कुछ देर पढ़ा नहीं लेते तब तक जैसे उन्हें चैन ही नहीं आता।


19 फरवरी 1973 से बेसिक शिक्षा विभाग में बतौर सहायक अध्यापक सेवा शुरू करने वाले मोहम्मद असलम की निष्ठा और सेवा भाव का ही परिणाम रहा कि वर्ष 2014 में उनका चयन राष्ट्रपति पुरस्कार के लिए हुआ था।

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शिक्षक दिवस के मौके पर पांच सितंबर 2014 उन्हें पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के हाथों सम्मानित किया गया था। मो असलम तमाम शिक्षकों के लिए प्रेरणास्रोत हैं। उनका कहना है कि छात्रों को हमेशा शिक्षा के लिए प्रेरित करना ही उनकी जिंदगी का मकसद है।

वह कहते हैं कि कोरोना शिक्षक और छात्रों के सामने एक नई चुनौती के रूप में है। बीमारी से बचाव के उपायों के साथ हमे इस चुनौती का मुकाबला करना होगा। इसमें बच्चों के अभिभावकों को भी आगे आना होगा। वह कहते हैं कि भौतिकवादी इस युग में एक स्वाभाविक प्रश्न खड़ा होता है कि शिक्षक को राष्ट्र निर्माता की भूमिका निभाने की प्रेरणा कहां से प्राप्त होगी।

इसका सीधा सा उत्तर है, हमारे देश में तो प्राचीन काल से शिक्षक इसी भूमिका का निर्वहन करते आए हैं। अंग्रेजी शिक्षा के प्रभाव से यह भाव लुप्त जरूर हुआ है, मगर समाप्त नहीं हुआ। हमारे देश में राष्ट्र निर्माता शिक्षकों की एक श्रृंखला रही हैं। जिनसे हमें प्रेरणा मिलती है।
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