शिक्षक दिवस के मौके पर पांच सितंबर 2014 उन्हें पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के हाथों सम्मानित किया गया था। मो असलम तमाम शिक्षकों के लिए प्रेरणास्रोत हैं। उनका कहना है कि छात्रों को हमेशा शिक्षा के लिए प्रेरित करना ही उनकी जिंदगी का मकसद है।
वह कहते हैं कि कोरोना शिक्षक और छात्रों के सामने एक नई चुनौती के रूप में है। बीमारी से बचाव के उपायों के साथ हमे इस चुनौती का मुकाबला करना होगा। इसमें बच्चों के अभिभावकों को भी आगे आना होगा। वह कहते हैं कि भौतिकवादी इस युग में एक स्वाभाविक प्रश्न खड़ा होता है कि शिक्षक को राष्ट्र निर्माता की भूमिका निभाने की प्रेरणा कहां से प्राप्त होगी।
इसका सीधा सा उत्तर है, हमारे देश में तो प्राचीन काल से शिक्षक इसी भूमिका का निर्वहन करते आए हैं। अंग्रेजी शिक्षा के प्रभाव से यह भाव लुप्त जरूर हुआ है, मगर समाप्त नहीं हुआ। हमारे देश में राष्ट्र निर्माता शिक्षकों की एक श्रृंखला रही हैं। जिनसे हमें प्रेरणा मिलती है।