ऐसे ही सितंबर महीने की एक तारीख में चार बसों से तीन लाख आठ हजार 540 रुपये की चपत परिवहन विभाग को लगाई गई है। सूत्रों की मानें तो इन बसों के परमिट और फिटनेस जांच में भी वाहनों के भौतिक सत्यापन के बिना प्रमाण पत्र जारी किया गया है।
वरिष्ठ अधिकारियों की शह पर हुए गोलमाल को लेकर कार्यालय में तरह तरह की चर्चाएं हैं। उधर, उपायुक्त परिवहन लक्ष्मीकांत मिश्रा का कहना है कि पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। कम टैक्स वसूले जाने से राजस्व हानि बड़ा अपराध है। इसमें शामिल दोषी अधिकारी और कर्मचारियों पर कार्रवाई होगी।