रेलवे की वेबसाइट हैक कर ई-टिकटिंग के चल रहे खेल का पर्दाफाश होने के बाद रोज नए खुलासे हो रहे हैं। सीबीआई ने जब ई-टिकटिंग नाम पर चल रहे फर्जीवाड़े की जांच की तो पता चला कि धांधली का मास्टरमाइंड अजय गर्ग सीबीआई का ही सॉफ्टवेयर प्रोग्रामर है।
सीबीआई ने अजय गर्ग को गिरफ्तार कर लिया है। अजय गर्ग द्वारा चलाए जा रहे धांधली के इस नेटवर्क में जौनपुर निवासी अनिल गुप्ता उसकी मदद करता था। तत्काल टिकट धांधली में अजय गर्ग अपने करीबी अनिल गुप्ता के जरिए सॉफ्टवेयर की बिक्री करता था।
सीबीआई की जांच में हुए खुलासे के मुताबिक, अनिल पहले मुंबई में ही रहकर इस गोरखधंधे को अंजाम देता था। वह 12 साल बाद पांच महीने पहले ही जौनपुर लौटा था और यहीं रहकर रेलवे टिकट की बुकिंग का काम करने लगा था।
उसकी गिरफ्तारी भी जौनपुर से ही हुई है। गर्ग पर्दे के पीछे रहकर काम करता था जबकि अनिल देशभर में एजेंटों को सॉफ्टवेयर मुहैया कराने और उनसे पैसा वसूलने का काम करता था।