बैठक के दौरान केबल कंपनियों के प्रतिनिधियों ने यह भी स्वीकार किया कि सड़कों और गलियों में फैले बिजली और इंटरनेट के उलझे हुए तारों का जाल काशी आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं के सामने शहर की नकारात्मक छवि पेश करता है। खासकर विश्व प्रसिद्ध धार्मिक नगरी होने के कारण शहर की सुंदरता और व्यवस्था को बनाए रखना बेहद आवश्यक है।
नगर निगम ने बताया कि स्मार्ट सिटी परियोजना के अंतर्गत जिन क्षेत्रों में अंडरग्राउंड ओएफसी (ऑप्टिकल फाइबर केबल) की सुविधा पहले से उपलब्ध है, वहां सभी कंपनियां अपने ओवरहेड तारों को हटाकर उन्हें जमीन के नीचे स्थानांतरित करेंगी। इससे न केवल सड़कों और गलियों का दृश्य साफ-सुथरा होगा, बल्कि तकनीकी रूप से भी नेटवर्क अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित हो जाएगा।
इसके अतिरिक्त, सीएम ग्रिड योजना के तहत बनाए गए यूटिलिटी डक्ट का भी इस्तेमाल केबल बिछाने के लिए किया जाएगा। इन डक्ट के माध्यम से विभिन्न कंपनियों की केबलों को व्यवस्थित तरीके से जमीन के नीचे रखा जाएगा, जिससे बार-बार सड़क खोदने की समस्या भी कम होगी।
खंभों पर लटकते तारों के गुच्छों को व्यवस्थित करने के लिए एयरटेल की ओर से एक विशेष वायर कवरिंग बॉक्स का मॉडल भी प्रस्तुत किया गया। इस बॉक्स में तारों को सुरक्षित ढंग से रखा जाएगा, जिससे वे खुले में लटकते हुए दिखाई नहीं देंगे और दुर्घटनाओं की संभावना भी कम होगी।
नगर निगम के अनुसार इस योजना का प्रथम चरण शहर के प्रमुख मार्गों पर लागू किया जाएगा। इसमें लहुराबीर से मैदागिन, मैदागिन से गोदौलिया और कालभैरव मंदिर मार्ग जैसे महत्वपूर्ण रास्ते शामिल हैं। इन मार्गों पर सबसे पहले वायर कवरिंग बॉक्स लगाए जाएंगे। यदि यह प्रयोग सफल रहा तो इसे चरणबद्ध तरीके से पूरे शहर में लागू किया जाएगा।
वहीं मणिकर्णिका घाट और ठठेरी बाजार जैसी तंग और संकरी गलियों में, जहां बिजली के खंभे मौजूद नहीं हैं, वहां अलग व्यवस्था की जाएगी। इन इलाकों में स्थानीय भवन स्वामियों के सहयोग से दीवारों पर विशेष क्लैंप लगाए जाएंगे, जिनके माध्यम से तारों को कसकर व्यवस्थित किया जाएगा।
नगर निगम प्रशासन ने इस कार्य को सफल बनाने के लिए शहरवासियों से भी सहयोग की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि नागरिकों के सहयोग से काशी को साफ, सुंदर और व्यवस्थित स्वरूप दिया जा सकता है, जिससे देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के सामने शहर की सकारात्मक छवि प्रस्तुत होगी।